Good morning



तुम्हारे इश्क़ को कैसे समेटू अल्फाज़ो में 
ये मोहब्बत मुझे नि:शब्द कर जाती हैं

साँवली लैला भी मजनू को ना दी दुनियाँ ने
मेरी वाली की रंगत तो खासी बेहतर है
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मस्ती भरी शायरी

न छत है यहां न हक में हवाऐं...... ​​है कश्ती भी जर्जर..ये कैसा सफर है...​​., अलग ही मजा है..फ़कीरी का अपना.... न पाने की चिंता.....