मिलन , प्रेम, स्नेह का अर्क तकली पर डाला है 

तब कहीं नर्म , गर्म ऊन का  धागा निकाला  है ||

मिलन  और विरह की दो सिलाइयाँ  खरीद  लाई  हूँ 

आज तेरे लिए स्वेटर बुनना सीख आई हूँ ||

                    achlasguleria

                   shayaripub.in

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

LOVE SHAYARI

हम तो कब से नशे में डूब जाने को तैयार हैं, इंतज़ार तो सिर्फ आपकी मुलाकात का है, HUM TO KAB SE NASHE MEIN DOOB JANE KO TIYAR HAIN INTZAR TO S...