जय सीयाराम

पति देवर सँग कुसल बहोरी। 
आइ करौं जेहिं पूजा तोरी॥
सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। 
भइ तब बिमल बारि बर बानी॥

अर्थ:-जिससे मैं पति और देवर के साथ कुशलतापूर्वक लौट आकर तुम्हारी पूजा करूँ। सीताजी की प्रेम रस में सनी हुई विनती सुनकर तब गंगाजी के निर्मल जल में से श्रेष्ठ वाणी हुई-॥

श्री रामचरित मानस 
अयोध्याकांड (१०२)
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सुविचार # inspirational thoughts

चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी डिप्रेशन
में नहीं आती,
वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है,
मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी 
चिंता में आ जाते हैं।
*तुलना से बचें और खुश रहें*।
ना किसी से ईर्ष्या , ना किसी से कोई होड़,
मेरी अपनी मंजिलें मेरी अपनी दौड़..!!!
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emotional shayari

मेरी किसी भी शायरी में तेरा नाम नही ।

तू बस दिल मे है सरेआम नही ।
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emotional shayari

_कहते हैं बात करनी चाहिए, बात करने से दिल हल्का होता हैं..

_लेकिन बात सुनने के लिए, कोई अपना होना भी तो चाहिए...

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jai siya ram # जय सियाराम

तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। 
पूजि पारथिव नायउ माथा॥
सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। 
मातु मनोरथ पुरउबि मोरी॥

अर्थ:-फिर रघुकुल के स्वामी श्री रामचन्द्रजी ने स्नान करके पार्थिव पूजा की और शिवजी को सिर नवाया। सीताजी ने हाथ जोड़कर गंगाजी से कहा- हे माता! मेरा मनोरथ पूरा कीजिएगा॥

श्री रामचरित मानस 
अयोध्याकांड (१०२)

श्रोत्रं चक्षुः स्पर्शनं च रसनं घ्राणमेव च।
अधिष्ठाय मनश्चायं विषयानुपसेवते॥

यह जीवात्मा श्रोत्र, चक्षु और त्वचा को तथा रसना, घ्राण और मन को आश्रय करके -अर्थात इन सबके सहारे से ही विषयों का सेवन करता है

भगवद गीता
पुरुषोत्तम योग
(अध्याय १५) 

🙏 हनुमानजी महाराज प्रिय हो 🙏
🙏 सदगुरु भगवान प्रिय हो 🙏 
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hare krishna



*इस संसार में*
      *तू कितना*
      *निश्चितं करके भेजता है*
                  *हे ईश्वर*
      *ना आते वक्त*
      *कुछ लाना पड़ता है*
                   *और*
      *न जाते वक्त*
      *कुछ ले जाना पड़ता है।*
*प्रणाम का महत्व* 💎 💎

    *महाभारत का युद्ध चल रहा था-*
     *एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि-*

       *"मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"*

        *उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई-*

    *भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|*

*तब - श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -*

   *श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -*

  *शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -*

      *द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने*- 
    *"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया, फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!*

   *"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?*

  *तब द्रोपदी ने कहा कि -*
     *"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -*

*भीष्म ने कहा -*

*"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्रीकृष्ण ही कर सकते है"*

   *शिविर से वापस लौटते समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -*

     *"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "* -

      
              *क्योंकि*:-

        *प्रणाम प्रेम है।*
        *प्रणाम अनुशासन है।*
        *प्रणाम शीतलता है।*                  
        *प्रणाम आदर सिखाता है।*
        *प्रणाम से सुविचार आते है।*
        *प्रणाम झुकना सिखाता है।*
        *प्रणाम क्रोध मिटाता है।*
        *प्रणाम आँसू धो देता है।*
        *प्रणाम अहंकार मिटाता है।*
        *प्रणाम हमारी संस्कृति है।*

        

सुप्रभात # Goodmorning

*बोलना और प्रतिक्रिया*
*करना जरूरी है लेकिन*

*संयम और सभ्यता का*
*आंचल नहीं छूटना चाहिये!!*

*स्वतंत्र रहिये विचारों से*
*बंधे रहिये संस्कारों से*
           
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emotional shayari

ऐसे जियो की अपने आप को पसंद आ जाओ..

दुनिया वालो की पसंद तो पल भर में बदल जाती हैं..                               shayaripub.com 

jai siya ram # जय सीयाराम


*जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया॥* 
 * सुभ कुसल निरंतर। सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर॥* 

भावार्थ:-जाम्बवान्‌ ने कहा- हे रघुनाथजी! सुनिए। हे नाथ! जिस पर आप दया करते हैं, उसे सदा कल्याण और निरंतर कुशल है। देवता, मनुष्य और मुनि सभी उस पर प्रसन्न रहते हैं॥

 *सोइ बिजई बिनई गुन सागर। तासु सुजसु त्रैलोक उजागर॥* 
 *प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू। जन्म हमार सुफल भा आजू॥* 

भावार्थ:-वही विजयी है, वही विनयी है और वही गुणों का समुद्र बन जाता है। उसी का सुंदर यश तीनों लोकों में प्रकाशित होता है। प्रभु की कृपा से सब कार्य हुआ। आज हमारा जन्म सफल हो गया॥


                   🌹 *चरित्र पर भरोसा* 🌹

*लक्ष्मण जी के द्वारा मारे गये मेघनाद की दाहिनी भुजा सती सुलोचना के समीप जा गिरी।* 

*सुलोचना ने कहाः 'अगर यह मेरे पति की भुजा है तो हस्ताक्षर करके इस बात को प्रमाणित कर दे।'* 

*कटी भुजा ने हस्ताक्षर करके सच्चाई स्पष्ट कर दी। सुलोचना ने निश्चय किया कि 'मुझे अब सती हो जाना चाहिए।' किंतु पति का शव तो राम-दल में पड़ा हुआ था। फिर वह कैसे सती होती !*

*जब अपने ससुर रावण से उसने अपना अभिप्राय कहकर अपने पति का शव मँगवाने के लिए कहा, तब रावण ने उत्तर दियाः*

*देवी ! तुम स्वयं ही राम-दल में जाकर अपने पति का शव प्राप्त करो।* 

*जिस समाज में बालब्रह्मचारी श्रीहनुमान, परम जितेन्द्रिय श्री लक्ष्मण तथा एक पत्नीव्रती भगवान श्रीराम विद्यमान हैं, उस समाज में तुम्हें जाने से डरना नहीं चाहिए।* 

*मुझे विश्वास है कि इन स्तुत्य महापुरुषों के द्वारा तुम निराश नहीं लौटायी जाओगी।*

*जब रावण सुलोचना से ये बातें कह रहा था, उस समय कुछ मंत्री भी उसके पास बैठे थे।* 

*उन लोगों ने कहाः जिनकी पत्नी को आपने बंदिनी बनाकर अशोक वाटिका में रख छोड़ा है, उनके पास आपकी बहू का जाना कहाँ तक उचित है ? यदि यह गयी तो क्या सुरक्षित वापस लौट सकेगी ?*

*यह सुनकर रावण बोलाः "मंत्रियो ! लगता है तुम्हारी बुद्धि विनष्ट हो गयी है। अरे ! यह तो रावण का काम है जो दूसरे की स्त्री को अपने घर में बंदिनी बनाकर रख सकता है, राम का नहीं।"*

*धन्य है श्रीराम का दिव्य चरित्र ! !! जिसका विश्वास शत्रु भी करता है और प्रशंसा करते थकता नहीं !* 

*प्रभु श्रीराम का पावन चरित्र दिव्य होते हुए भी इतना सहज सरल है कि मनुष्य चाहे तो अपने जीवन में भी उसका अनुसरण कर सकता है !*


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कभी-कभी किसी के साथ ऐसा रिश्ता बन जाता है ,,,

कि हर चीज़ से पहले ,,उसका ख्याल आता है,,,
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जय सियाराम #Jai Shree Ram

शबरी बोली:- यदि रावण का अंत नहीं करना होता, तो राम तुम यहां कहां से आते!

राम गंभीर हुए

कहा, भ्रम में न पड़ो माता

राम क्या रावण का वध करने आया है !!

अरे रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से वाण चला भी कर सकता है।

राम हजारों कोस चल कर इस गहन वन में आया है तो केवल तुमसे मिलने आया है माता...
ताकि हजारों वर्षों बाद जब कोई पाखंडी भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे❓
 तो इतिहास चिल्ला कर उत्तर दे कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी मां ने मिल कर गढ़ा था।

जब कोई कपटी भारत की परम्पराओं पर उंगली उठाए तो ❓
तो काल उसका गला पकड़ कर कहे कि नहीं, यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहां एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक दरिद्र वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है।

राम वन में बस इसलिए आया है ताकि जब युगों का इतिहास लिखा जाए तो उसमें अंकित हो कि सत्ता जब पैदल चल कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तभी वह "रामराज्य" है।

राम वन में इसलिए आया है ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतिक्षाएं अवश्य पूरी होती हैं

शबरी एकटक राम को निहारती रहीं

राम ने फिर कहा:- राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता

राम की यात्रा प्रारंभ हुई है भविष्य के लिए आदर्श की स्थापना के लिए

राम आया है ताकि भारत को बता सके कि "अन्याय का अंत करना ही धर्म है"

राम आया है ताकि युगों को सीख दे सके कि विदेश में बैठे शत्रु की समाप्ति के लिए आवश्यक है कि पहले.......

देश में बैठी उसकी समर्थक "सूर्पणखाओं" की नाक काटी जाए और खर-दूषणो का घमंड तोड़ा जाए

और.....
राम आया है ताकि युगों को बता सके कि.....
रावणों से युद्ध केवल राम की शक्ति से नहीं बल्कि वन में बैठी "शबरी के आशीर्वाद" से जीते जाते हैं

शबरी की आँखों में जल भर आया था

उसने बात बदलकर कहा:- बेर खाओगे राम ❓

राम मुस्कुराए, "बिना खाये जाऊंगा भी नहीं माता"

शबरी अपनी कुटिया से झपोली में बेर ले कर आई और राम के समक्ष रख दिया

राम और लक्ष्मण खाने लगे तो कहा:- मीठे हैं ना, प्रभु ❓

यहां आ कर मीठे और खट्टे का भेद भूल गया हूं,माता

बस इतना समझ रहा हूं कि यही अमृत है

शबरी मुस्कुराईं, बोली:- सचमुच तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो राम, गुरुदेव ने ठीक कहा था"

सियापति रामचन्द्र की जय
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...