🌹सबके लिए "प्राथमिकता" बनें "विकल्प" नहीं ।🌹
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
emotional shayari
❤तू फिर से ,दिल ही दुखाने के लिये आ।❤
❤ फिर से मुझे,छोड़ के जाने के लिये आ❤
❤किस-किस को बताएंगे,जुदाई का सबब हम।❤
❤तू मुझसे ख़फ़ा है,तो ज़माने के लिये आ❤
❤सूख गया आँख का पानी भी यहां❤
❤मेहरबां तू मुझको,रूलाने के लिये आ।❤
❤कुछ तो मेरे दिल में मोहब्बत का भ्रम रख!❤
❤इस बार तू मुझको मनाने के लिये आ।❤
❤है प्यार तेरा रेत पे लिखी हुई दास्ताँ ❤
❤ तू बन के लहर इसको,मिटाने के लिये आ❤
emotional shayari#pain#love#
⚘⚘लोग उदासी पकड़ ही नहीं पाते हैं ⚘⚘
⚘⚘हम इतना संभल के मुस्कुराते हैं ।।⚘⚘
⚘⚘खींच रखी हैं इश्क की हदें तुमने ⚘⚘
⚘⚘नादां को पता क्या की इश्क बेपनाह होता है⚘⚘
Vishnu ji......
⚘⚘ये पगली जब मुझ से कहती है
मुझ से इतनी मोहब्बत करो ना
मैं डूब ना जाऊँ कहीं तुम्हारी मोहब्बत में
कही में अपने दिल में आशियाना ना बसा लू
जब तुम्हारे रूहानी अल्फ़ाज़ों को में पड़ती हूँ
तुम्हारा चहरा मुझे इस अल्फ़ाज़ों में दिखने लगता है
जब से तुम्हारी मोहब्बत मेरे दिल पनप रही है
मैं तो हफ़्तों से सोयी नहीं बोल दो ना ज़रा
जो तुम्हारे दिल में जो मेरे लीये मोहब्बत है
मैं किसी से कहूँगी नहीं बोल दो ना ज़रा...
जानती हूँ मेरी कमी तुमको अपने दिल में महसूस होती है
रोज़ मेरी मोहब्बत तुम्हारी रूह को भीगा देती है
तुम्हारी आँखों में मेरी मोहब्बत की अधूरी सी कुछ ख्वाहिशें
जानती हूँ तुम मुझ से रूह से मोहब्बत करते हों…..ये पगली जब मुझ से कहती है
मुझ से इतनी मोहब्बत करो ना
मैं डूब ना जाऊँ कहीं तुम्हारी मोहब्बत में
कही में अपने दिल में आशियाना ना बसा लू
जब तुम्हारे रूहानी अल्फ़ाज़ों को में पड़ती हूँ
तुम्हारा चहरा मुझे इस अल्फ़ाज़ों में दिखने लगता है
जब से तुम्हारी मोहब्बत मेरे दिल पनप रही है
मैं तो हफ़्तों से सोयी नहीं बोल दो ना ज़रा
जो तुम्हारे दिल में जो मेरे लीये मोहब्बत है
मैं किसी से कहूँगी नहीं बोल दो ना ज़रा...
जानती हूँ मेरी कमी तुमको अपने दिल में महसूस होती है
रोज़ मेरी मोहब्बत तुम्हारी रूह को भीगा देती है
तुम्हारी आँखों में मेरी मोहब्बत की अधूरी सी कुछ ख्वाहिशें
जानती हूँ तुम मुझ से रूह से मोहब्बत करते हों…..⚘⚘
Good morning#
⚘अनमोल बचन ⚘
जो व्यक्ति दूसरों को सहारा देता है,उसे अपने लिए सहारा माँगना नहीं पड़ता, परमात्मा स्वतः ही दे देता है.।
⚘🙏🙏 शुभ प्रभात🙏🙏⚘
shayaripub.com# emotional shayari #
⚘छू लूं तुम्हे की मेरी रूह का एहसास हो तुम⚘
⚘कोई नहीं अब सिर्फ दिल के पास हो तुम⚘
⚘जो हर पल छूकर गुजरे वो जज्बात हो तुम⚘
⚘तड़प रही जो कब से! धड़कनो की आवाज हो तुम⚘
⚘सुकून नहीं कहीं जैसे रूह"की प्यास हो तुम⚘
⚘जिस्म मे जो बची है वो आखिरी साँस हो तुम…..⚘
emotional shayari shayari,शायरी Goodmorning
⚘छू लूं तुम्हे की मेरी रूह का एहसास हो तुम⚘
⚘कोई नहीं अब सिर्फ दिल के पास हो तुम⚘
⚘जो हर पल छूकर गुजरे वो जज्बात हो तुम⚘
⚘तड़प रही जो कब से! धड़कनो की आवाज हो तुम⚘
⚘सुकून नहीं कहीं जैसे रूह"की प्यास हो तुम⚘
⚘जिस्म मे जो बची है वो आखिरी साँस हो तुम…..⚘
विष्णु
#कश्यप अवतार#hindu#mythology#
परंतु तमोगुण स्वभाव और बलपूर्वक स्वर्ग प्राप्ति की आकांक्षा के कारण दैत्य प्रायः देवताओं पर आक्रमण करते रहते थे।
इन युद्धों में विजय श्री कभी देवताओं की कभी दैत्यों का वरण करती थी ।⚘
बलि के दैत्याधिपति बनने पर दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया ।
बलि के दैत्याधिपति बनने पर दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया ।
पराजित निरूपाय देवता पितामह की शरण में गए पितामह ने वेद वाणी द्वारा भगवान श्री हरि की स्तुति की और उनसे देवताओं के कष्टों का निवारण करने की प्रार्थना की।
श्री हरि ने देवताओं को सलाह दी कि तुम लोग अपने बंधुत्व का स्मरण करा कर दैत्यों सेसंधि कर लो और अमृत का प्रलोभन देकर उनके साथ समुद्र मंथन करो।
इससे तुम्हें अमृत की प्राप्ति होगी जिसे पीकर तुम अमर हो जाओगे श्रीहरि की योजना के अनुसार देवताओं ने राक्षसों से संधि कर ली। अमृत पान के लिए वह भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए ।
नागराज वासुकी ने नेति और मन्दराचल ने मथानी बनना स्वीकार कर लिया।।
जब समुद्र मंथन प्रारंभ हुआ तो आधारहीन मंदराचल समुद्र में डूबने लगा यह देखकर भगवान श्री हरि ने एक लाख योजन विस्तृत पीठ वाले कच्छप का रूप धारण किया और मन्दर गिरी को अपने पीठ पर धारण कर समुद्र मंथन का कार्य सुचारू रूप से संपादित किया इस प्रकार देवताओं की हित के लिए उन परम प्रभु ने कच्छप अवतार लिया।
श्री हरि ने देवताओं को सलाह दी कि तुम लोग अपने बंधुत्व का स्मरण करा कर दैत्यों सेसंधि कर लो और अमृत का प्रलोभन देकर उनके साथ समुद्र मंथन करो।
इससे तुम्हें अमृत की प्राप्ति होगी जिसे पीकर तुम अमर हो जाओगे श्रीहरि की योजना के अनुसार देवताओं ने राक्षसों से संधि कर ली। अमृत पान के लिए वह भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए ।
नागराज वासुकी ने नेति और मन्दराचल ने मथानी बनना स्वीकार कर लिया।।
जब समुद्र मंथन प्रारंभ हुआ तो आधारहीन मंदराचल समुद्र में डूबने लगा यह देखकर भगवान श्री हरि ने एक लाख योजन विस्तृत पीठ वाले कच्छप का रूप धारण किया और मन्दर गिरी को अपने पीठ पर धारण कर समुद्र मंथन का कार्य सुचारू रूप से संपादित किया इस प्रकार देवताओं की हित के लिए उन परम प्रभु ने कच्छप अवतार लिया।
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कल्याण के सौजन्य से
#वराहावतार# avatars#
वराहावतार की कहानी
इससे चिंतित होकर पितामह ब्रह्माजी ने भगवान श्री हरि का मन ही मन शरण किया।
स्मरण करते ही भगवान उनके नासिका छिद्र से वाराह शिशु के रूप में निकल पड़े और देखते ही देखते उन्होंने विशाल पर्वत आकार श्वेत बराह का रूप धारण कर लिया और समुद्र के जल में प्रवेश किया और रसातल में पृथ्वी को लाने लगे।
यह देखकर हिरण्याक्ष क्रुद्ध होकर गदा लेकर उनसे युद्ध करने लगा परंतु उन वाराह रूप धारी श्री हरि ने उसे लीला पूर्वक अपने हाथ के प्रहार से मार डाला और पृथ्वी को पुनः अपनी जगह पर प्रतिष्ठित कर दिया।
स्मरण करते ही भगवान उनके नासिका छिद्र से वाराह शिशु के रूप में निकल पड़े और देखते ही देखते उन्होंने विशाल पर्वत आकार श्वेत बराह का रूप धारण कर लिया और समुद्र के जल में प्रवेश किया और रसातल में पृथ्वी को लाने लगे।
यह देखकर हिरण्याक्ष क्रुद्ध होकर गदा लेकर उनसे युद्ध करने लगा परंतु उन वाराह रूप धारी श्री हरि ने उसे लीला पूर्वक अपने हाथ के प्रहार से मार डाला और पृथ्वी को पुनः अपनी जगह पर प्रतिष्ठित कर दिया।
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emotional shayari
⚘हर शख्श खफा मुझसे⚘
⚘⚘अंजुमन में था ..⚘⚘
⚘क्योंकि मेरे लब पर वही था⚘
⚘⚘जो मेरे मन में था...!!⚘
emotional shayari#love#
⚘किस्मत बुरी या मैं बुरा⚘
⚘यह फैसला हो ना सका⚘⚘
⚘मैं हर किसी का हो गया⚘
⚘कोई मेरा ना हो सका।।⚘⚘
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वो हमारे दिल से निकलने का रास्ता भी नहीं ढूंढ सके जो कहते थे.. तुम्हारी रग रग से वाकिफ हैं हम.. Shayaripub.in