मुझे कुछ न कुछ सुनाता है
अपनी बात जिद से मनवाता है
कभी गलत को सही
सही को गलत ठहराता है
मेरा दिमाग गर्म करके ही
गर्म गर्म खाना खाता है
गलत कोई भी हो
वो मुझ पर ही चिल्लाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
मुझे मेरे होने का अहसास दिलाता है
कमरे को प्लेटफार्म (रेल) बना देता है
किताबों जुराबों की मण्डी सजा सजा देता है
English गाने सुनते सुनते गर्दन बहुत हिलाता है
जाने फिरंगी शब्दो को कितना समझ पाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
my son, बेटा
मुझे कुछ न कुछ सुनाता है
अपनी बात जिद से मनवाता है
कभी गलत को सही
सही को गलत ठहराता है
मेरा दिमाग गर्म करके ही
गर्म गर्म खाना खाता है
गलत कोई भी हो
वो मुझ पर ही चिल्लाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
मुझे मेरे होने का अहसास दिलाता है
कमरे को प्लेटफार्म (रेल) बना देता है
किताबों जुराबों की मण्डी सजा सजा देता है
English गाने सुनते सुनते गर्दन बहुत हिलाता है
जाने फिरंगी शब्दो को कितना समझ पाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
अपनी बात जिद से मनवाता है
कभी गलत को सही
सही को गलत ठहराता है
मेरा दिमाग गर्म करके ही
गर्म गर्म खाना खाता है
गलत कोई भी हो
वो मुझ पर ही चिल्लाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
मुझे मेरे होने का अहसास दिलाता है
कमरे को प्लेटफार्म (रेल) बना देता है
किताबों जुराबों की मण्डी सजा सजा देता है
English गाने सुनते सुनते गर्दन बहुत हिलाता है
जाने फिरंगी शब्दो को कितना समझ पाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
good morning
दर्द एक संकेत है कि
आप जिंदा हो
समस्या एक संकेत है कि
आप मजबूत हो
दोस्त और परिवार एक संकेत है कि
आप अकेले नहीं हो
good morning, सुप्रभात
आज बुरा है! तो डर मत,
कल अच्छा आयेगा...
वक़्त ही तो है, रुक थोड़ी जायेगा..!!
दर्द एक संकेत है कि
आप जिंदा हो
समस्या एक संकेत है कि
आप मजबूत हो
दोस्त और परिवार एक संकेत है कि
आप अकेले नहीं हो
Goodmorning
सुखी होने में ज्यादा खर्च नहीं होता,लेकिन हम कितने सुखी हैं, ये लोगों को दिखाने में बहुत खर्च होता है।।
मेरी कथा का एक हेतु है ....आपका चित्त प्रसन्न हो....
मैं मोक्ष बांटने नहीं निकला हूँ ... मैं प्रसन्नता बांटने के लिए निकला हूँ ....आप प्रसन्न रहो ....क्यों इतने सीरियस हो ?....
मैं जगत की इतनी बदनामियाँ मेरे सिर का मुकुट बना कर बैठा हूँ ....फिर भी उसी मार्ग पर चल रहा हूँ ..... कभी ये गांव ...कभी ये गांव ....कभी ये गांव....
मतलब क्या ?....आपकी चैत्सिक प्रसन्नता.... क्योंकि आदि शंकर ने हमें बताया प्रसन्न चित्ते परमात्म दर्शन..... भगवान का दर्शन करना है तो तुम्हारा चित्त प्रसन्न हो.....
बापू
मानस रामरक्षा
have a great time,shayari
शेरो-शायरी तो महज...
दिल बहलाने का ज़रिया है साहब !
लफ़्ज़ कागज पर उतारने से..
गुजरे हुए पल नहीं लौटा करते !!
Dev
Shayaripub.in
कौन कहता है कि कुछ नहीं
तेरे मेरे दरमियाँ...
वो एहसासों का हुजूम,
वो जज़्बातों का सैलाब,,
वो अनकही बातें,
वो अनछुए अरमाँ,,
बिखरी सी ख़्वाहिशें,
फैले से ख़्वाब,,
वो सुकूँ के बिछे गलीचे,
वो ख़यालातों के बगीचे,,
वो महकती हुई साँसें,
उम्मीदों की मुस्कान,,
कौन कहता है कि कुछ नहीं
तेरे मेरे दरमियाँ...
एक कहानी
*कमाई की परिभाषा सिर्फ धन से ही तय नही होती*
*लेकिन.....*
*रिश्ते, सन्मान, तजुर्बा, प्रेम और सेवा से ही कमाई की परिभाषा तय होती है*
*🌺जय सियाराम🌺*
अगर मेंढक को गर्म उबलते पानी में डाल दें तो वो छलांग लगा कर बाहर आ जाएगा.. परन्तु उसी मेंढक को अगर सामान्य तापमान पर पानी से भरे बर्तन में रख दें और पानी धीरे धीरे गरम करने लगें तो क्या होगा ?
मेंढक फौरन मर जाएगा ?
जी नहीं....
ऐसा बहुत देर के बाद होगा...
दरअसल होता ये है कि जैसे जैसे पानी का तापमान बढता है, मेंढक उस तापमान के हिसाब से अपने शरीर को Adjust करने लगता है।
पानी का तापमान, खौलने लायक पहुंचने तक, वो ऐसा ही करता रहता है।अपनी पूरी उर्जा वो पानी के तापमान से तालमेल बनाने में खर्च करता रहता है लेकिन जब पानी खौलने को होता है और Boiling Point तक पहुंच जाता है, तब मेंढक अपने शरीर को उसके अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है, और अब पानी से बाहर आने के लिए, छलांग लगाने की कोशिश करता है।
लेकिन अब उसके लिए ये मुमकिन नहीं हो पाता है..क्योंकि अपनी छलाँग लगाने की क्षमता के बावजूद , मेंढक ने अपनी सारी ऊर्जा वातावरण के साथ खुद को Adjust करने में खर्च कर दी है। अब पानी से बाहर आने के लिए छलांग लगाने की शक्ति, उस में बची ही नहीं I वो पानी से बाहर नहीं आ पायेगा, और मारा जायेगा I
मेढक क्यों मर जाएगा ?
कौन मारता है उसको ?
पानी का तापमान ?
गरमी ?
या उसके स्वभाव से ?
मेंढ़क को मार देती है, उसकी असमर्थता...
सही वक्त पर सही फैसला न लेने की अयोग्यता । यह तय करने की उसकी अक्षमता कि कब पानी से बाहर आने के लिये छलांग लगा देनी है।
इसी तरह हम भी अपने वातावरण और लोगो के साथ सामंजस्य बनाए रखने की तब तक कोशिश करते हैं, जब तक की छलांग लगा सकने की हमारी सारी ताकत खत्म नहीं हो जाती ।
लोग हमारे तालमेल बनाए रखने की काबिलियत को कमजोरी समझ लेते हैं। वो इसे हमारी आदत और स्वभाव समझते हैं। उन्हें ये भरोसा होता है कि वो कुछ भी करें, हम तो Adjust कर ही लेंगे और वो तापमान बढ़ाते जाते हैं।
हमारे सारे इंसानी रिश्ते, राजनीतिक और सामाजिक भी, ऐसे ही होते हैं, पानी, तापमान और मेंढक जैसे। ये तय हमे ही करना होता है कि हम जल मे मरें या सही वक्त पर कूद निकलें।
shubh sombar,शुभ सोमवार
इंसानियत,
बहुत बड़ा खज़ाना है,
उसे लिबास में नहीं,
इंसान में तलाश करें ।।
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