वो दोस्त मेरी नज़र में बहुत मायने रखते हैँ
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
good morning
मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाये हमने,
अफसोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं,
मत पूछों क्या गुजरती है दिल पर,
good morning
नज़र तलाशती हैं जिसको,
वो प्यारा सा ख्वाब हो तुम।
मिलती हैं दुनिया सारी,
न मिलकर भी लाजवाब हो तुम।
dev,love shayari
कौन कहता है कि कुछ नहीं
तेरे मेरे दरमियाँ...
वो एहसासों का हुजूम,
वो जज़्बातों का सैलाब,,
देव की कलम से
वो अनकही बातें,
वो अनछुए अरमाँ,,
बिखरी सी ख़्वाहिशें,
फैले से ख़्वाब,,
वो सुकूँ के बिछे गलीचे,
वो ख़यालातों के बगीचे,,
वो महकती हुई साँसें,
उम्मीदों की मुस्कान,,
कौन कहता है कि कुछ नहीं
तेरे मेरे दरमियाँ...
Goodmorning
.
एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने गया। नाई बहुत बडा़ नास्तिक था वह किसी ईश्वरीय अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता था, बाल काटते समय उन दोनो के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग बातें करते-करते “ईश्वर” के विषय पर बातें करने लगे। तभी नाई ने कहा- "मैं ईश्वर के अस्तित्व को कतई नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो।" व्यक्ति ने आश्चर्य से पूछा- “तुम ऐसा क्यों कह रहे हो। अरे ईश्वर तो जग के कण कण में है।
नाई ने कहा- “बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे तो तुम समझ जाओगे कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है। अगर ईश्वर होते, तो क्या इतने सारे लोग भूखे मरते ? क्या इतने सारे लोग बीमार होते ? क्या दुनिया में इतनी हिंसा होती ? ईतने पाप होते क्या कष्ट या पीड़ा होती ? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति दे।" व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा।
नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया। वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, और ऐक ढाबे में चाय पिने लगा कुछ देर बाद उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे। सड़क पर खड़े हो कर वह बेतरबीब से सिगरेट पी रहा था वह व्यक्ति उठकर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा- “क्या तुम्हें पता है ? नाइयों का भी अस्तित्व नहीं होता।” नाई ने उसे घूरते हुवे कहा- कया मतलब आप कहना कया चाहते है “
मैं कहना चाहता हूं कि नाई इत्यादि कुछ नहीं होता है न ही नाई कि ज़रूरत है।
तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो ? क्या तुम्हें मैं दिखाई नहीं दे रहा ? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ। और मैंने अभी-अभी तुम्हारे बाल काटे हैं।” तूम पगला गये लगते हो व्यक्ति ने कहा- “नहीं ! नाई नहीं होते हैं। अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता ?" व्यक्ति ने बाहर खडे़ उस आदमी कि तरफ इशारा करते हुए कहा नाई ने कहा- “अगर वह व्यक्ति किसी नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा ?" व्यक्ति ने कहा- “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, यही बात है। ईश्वर भी होते हैं। लेकिन कुछ लोग ईश्वर पर विश्वास ही नहीं करते तो ईश्वर उनकी मदद कैसे करेंगे ?"
विश्वास ही सत्य है। अगर ईश्वर पर विश्वास करते हैं तो हमें हर पल उनकी अनुभूति होती है और अगर हम विश्वास नहीं करते तो हमारे लिए उनका कोई अस्तित्व

Good night
अचला गुलेरिया की कविता जो गहन सोच की उपज है
एक दिन
मेरे अंदर कुछ टूटता है बिखर जाता है हर दिन मैं अनसुना करती हूं उस आवाज को हर दिन
वह टूटन असहज करती है मुझे मगर उसको लादे पीठ पर थक जाती हूं रुक जाती हूं फिर आगे की तरफ चल देती हूं हर दिन
आंसू बरबस आते हैं अपने हालात पर उन्हें हाथ में पकड़ कर मसलती हूं कुछ सोचती हूं फिर स्याही बना उड़ेल देती कागज पर हर दिन
बदल रहे दिन लोग शहर के शहर यह कौन बदल रहा ..और क्यूँ? बदलाव अच्छा भी हो तो खा जाता है उसको जो पुराना था पर अपना था यह मैं तन्हाई में सोचती हूं हर दिन
चेहरे पर लकीरें अनुभव की गहरी खाइयों की तरह घसीट रही हैं उन विचारों के भंवर में जहां डरते हैं अपनों से बिछड़ जाने से हर दिन
कोई पहले कोई बाद में जाने लगे हैं घर से चुपचाप उठकर किसी नए सितारों के शहर में बुरा लगता है बहुत बुरा लगता है फिर सोचती हूं मैं भी तो जाऊंगी ऐसे ही चुपचाप उठ कर एक दिन
good night
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।
गुजरे वक्त की हसीन यादों में खो जाने दो
जब तक अंधेरा है
दिल के शहर में
मुझे बस सो जाने दो
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।
गुजरे वक्त की हसीन यादों में खो जाने दो
जब तक अंधेरा है
दिल के शहर में
मुझे बस सो जाने दो
good morning
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
सम्भावनाओं से घिरे हैं,
हर दिवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा
पहाड़ गुज़र सकता है।
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
सम्भावनाओं से घिरे हैं,
हर दिवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा
पहाड़ गुज़र सकता है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
shayaripub.in
सुप्रभात, राम राम
अचलाएसगुलेरिया कृत.....
ऐसे साथ निभा मन मेरे.. राम नाम गुण गाने देजीवन है अनमोल रे मनवा ...इस को सफल बनाने दे
हरि नाम में डूब जा मनवा शरणागत हो जा हरिका
उसके नाम की माला जप ले तोड़ दे हर बंधन जग का
सारे बंधन तोड़ के मुझको राम शरण में जाने दे ।।
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे
सुख दुख हो या हंसना रोना सब कुछ तेरी माया है
इसमें उलझ के मिट जाएगी यह जो कंचन काया है
उदासीन करके जग से मुझे चिदानंद तक जाने दे
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे
तू जो प्रेम करेगा हरि से हरि मुझे मिल जाएंगे
सब प्रपंच छोड़ जग के हम हरी नाम गुण गाएंगे
प्रभु से जन्म जन्म का रिश्ता निष्ठा से मुझे निभाने दे
ऐसे साथ निभा मन मेरे राम नाम गुण गाने दे....
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे
Good morning, beta
वो दूर जाता है तो घबरा जाती हूँ
जाने कैसे कैसे दिल को समझाती हूँ
फोन करती हूँ बार बार...
वो तंग हो जाता है!
खुश हूँ कहता है ,आंसू भी छुपाता है
खाना खा लेता हूँ भरोसा दिलाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता
जाने कैसे कैसे दिल को समझाती हूँ
फोन करती हूँ बार बार...
वो तंग हो जाता है!
खुश हूँ कहता है ,आंसू भी छुपाता है
खाना खा लेता हूँ भरोसा दिलाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
Good morning,#shayaripub.in
मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको Shayaripub.in
-
जग तो देखे महज प्रस्तुतीकरण तुम्हारा ईश्वर सदा ही देखे अंतः करण तुम्हारा धर्म-कर्म सब उसको अर्पित कर दो अपने सहज भाव से पूरे हो...
-
वो हमारे दिल से निकलने का रास्ता भी नहीं ढूंढ सके जो कहते थे.. तुम्हारी रग रग से वाकिफ हैं हम.. Shayaripub.in
