Good night

जिंदगी वहीं लौटना चाहती है,
जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं होता,
         बचपन..... मासूमियत
       *पुराना घर... पुराने दोस्त...!!
              .    .. ...Good night 

      

Good morning

सुख तीन बार आता है
पहले "उम्मीद"बन कर...
फिर "सांत्वना"बन कर...
और अंत में "समझौता" बन कर ....

*आज की कहानी*
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*,,,नालायक बेटा,,*
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"बेटा , हमारा एक्सीडेंट हो गया है ।मुझे ज्यादा चोट नहीं आई पर तेरी माँ की हालत
गंभीर है।
कुछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खून चढ़ाना है।"बासठ साल के माधव जी ने अपने बड़े बेटे से फोन पर कहा।
"पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल।मेरा आना नहीं हो सकेगा।मुझे विदेश मे नौकरी का पैकेज मिला है तो उसी की तैयारी कर रहा हूँ।आपका भी तो यही सपना था ना? इसलिये हाथ भी तंग चल रहा है।पैसे की व्यवस्था कर लीजिए मैं बाद मे दे दूँगा।"उनके बडे़ इंजिनियर बेटे ने जबाब दिया।
उन्होनें अपने दूसरे डाॅक्टर बेटे को फोन किया तो उसने भी आने से मना कर दिया । उसे अपनी ससुराल में शादी मे जाना था।
हाँ इतना जरुर कहा कि पैसों की चिंता मत कीजिए मैं भिजवा दूँगा।
यह अलग बात है कि उसने कभी पैसे नहीं भिजवाए।
उन्होंने बहुत मायूसी से फोन रख दिया।अब उस नालायक को फोन करके क्या फायदा।
जब ये दो लायक बेटे कुछ नहीं कर रहे तो वो नालायक क्या कर लेगा?
उन्होंने सोचा और बोझिल कदमों से अस्पताल में पत्नी के पास पहुंचे और कुर्सी पर ढेर हो गये।पुरानी बातें याद आने लगे, 

माधव राय जी स्कूल मे शिक्षक थे।उनके तीन बेटे और एक बेटी थी।बड़ा इंजिनियर और मझला डाक्टर था।दोनों की शादी बड़े घराने में हुई थी।दोनो अपनी पत्नियों के साथ अलग अलग शहरों में
रहते थे।
बेटी की शादी भी उन्होंने खूब धूमधाम से की थी।
सबसे छोटा बेटा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाया था।ग्यारहवीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और घर में ही रहने लगा। 
कहता था मुझे नौकरी नहीं करनी अपने माता  पिता की सेवा करनी है पर मास्टर साहब उससे बहुत नाराज रहते थे।
उन्होंने उसका नाम नालायक रख दिया था ।दोनों बड़े भाई  पिता के आज्ञाकारी थे पर वह गलत बात पर उनसे भी बहस कर बैठता था। इसलिये माधव जी उसे पसंद नही करते थे।
जब माधव जी रिटायर हुए तो जमा पुँजी कुछ भी नही थी।सारी बचत दोनों बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटी की शादी मे खर्च हो गई थी।
शहर में एक घर , थोड़ी जमीन और गाँव में थोडी सी जमीन थी।घर का खर्च उनके पेंशन से चल रहा था।
माधव जी को जब लगा कि छोटा सुधरने वाला नही तो उन्होंने बँटवारा कर दिया और उसके हिस्से की जमीन उसे देकर उसे गाँव में ही रहने भेज दिया। हालाँकि वह जाना नहीं चाहता था पर पिता की जिद के आगे झुक गया और गाँव में ही झोपड़ी बनाकर रहने लगा।
माधव जी सबसे अपने दोनो होनहार और लायक बेटों की बड़ाई किया करते।उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था।
पर उस नालायक का नाम भी नहीं लेते थे।
दो दिन पहले दोनों पति पत्नी का एक्सीडेन्ट हो गया था । वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी अस्पताल मे भर्ती थे।डाॅक्टर ने उनकी पत्नी को आपरेशन करने को कहा  था
"पापा, पापा!" सुन कर तंद्रा टुटी तो देखा सामने वही नालायक खड़ा था।उन्होंने गुस्से से मुँह फेर लिया।
पर उसने पापा के पैर छुए और रोते हुए बोला "पापा आपने इस नालायक को क्यों नहीं बताया? पर मैने भी आप लोगों पर जासूस छोड़ रखे हैं।खबर मिलते ही भागा आया हूँ।"
पापा के विरोध के वावजूद उसने उनको एक बड़े अस्पताल मे भरती कराया।
माँ का आपरेशन कराया ।अपना खून दिया । दिन रात उनकी सेवा में लगा रहता कि एक दिन वह गायब हो गया।
वह उसके बारे मे फिर बुरा सोचने लगे थे कि तीसरे दिन वह वापस आ गया।महीने भर में ही माँ एकदम भली चंगी हो गई।
वह अस्पताल से छुट्टी लेकर उन लोगों को घर ले आया। माधव जी के पूछने पर बता दिया कि खैराती अस्पताल था पैसे नहीं लगे हैं।
घर मे नौकरानी थी ही।वह उन लोगों को छोड़ कर वापस गाँव चला गया।

धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।एक दिन यूँ ही उनके मन मे आया कि उस नालायक की खबर ली जाए।
दोनों जब गाँव के खेत पर पहुँचे तो झोपड़ी में ताला देख कर चौंके।
उनके खेत मे काम कर रहे आदमी से पूछा तो उसने कहा "यह खेत अब मेरे हैं।"

"क्या?पर यह खेत तो...." उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ।
"हाँ।उसकी माँ की तबीयत बहुत खराब थी। उसके पास पैसे नहीं थे तो उसने अपने सारे खेत बेच दिये। वह रोजी रोटी की तलाश में दूसरे शहर चला गया है।बस यह झोपडी उसके पास रह गई है।यह रही उसकी चाबी।"उस आदमी ने कहा।
वह झोपड़ी मे दाखिल हुये तो बरबस उस नालायक की याद आ गई।
टेबल पर पड़ा लिफाफा खोल कर देखा तो उसमे रखा अस्पताल का नौ लाख का बिल उनको मुँह चिढ़ाने लगा।
उन्होंने अपनी पत्नी से कहा - "जानकी तुम्हारा बेटा नालायक तो था ही झूठा भी है।"
अचानक उनकी आँखों से आँसू गिरने लगे और वह जोर से चिल्लाये -"तूँ कहाँ चला गया नालायक, 
अपने पापा को छोड़ कर।एक बार वापस आ जा फिर मैं तुझे कहीं नही जाने दूँगा।"
उनकी पत्नी के आँसू भी बहे जा रहे थे।
और माधव जी को इंतजार था अपने नालायक बेटे को अपने गले से लगाने का।

सचमुच बहुत नालायक था वो।
ये कहानी पढ़ते वक्त अगर आँखें नम हुई तो समझो हमारे अंदर भी एक ऩालायक है,,,

                    बेटा हो तो ऐसा।

*

Good morning

अचला की कलम से.....
जब कभी गर्दिश में डूबा सितारा
कर गया हर कोई हमसे किनारा
उसका सहारा बनेंगे सदा
जिसने दिया गर्दिश में सहारा
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मैं हर्फ़ हर्फ़ बिखरी हूँ 
जब भी खोलोगे ये क़िताब
मैं याद आऊँगी ...

 बरसात की हर बूँद में
मिलूँगी बरसती मैं...
कभी बारिशों में भीगोगे
तो याद आऊँगी....

तेरी  साँस-साँस में..
बसेरा है मेरा...
सुनोगे सांसों का संगीत
 तो समझ जाओगे..

लम्हा लम्हा मैं भी
तेरी याद में तपती हूँ 
खुद को खुद से खफा पाओगे
तो जान जाओगे 

मैं पल पल ....
रब से तेरी खुशी मांगती हूँ 
तुम जब हाथ दुआ में उठाओगे
तो याद आऊँगी.....

Good morning shayari

मेघ काले काले तेरे बालों से जलते हैं
समंदर की दीवानगी देखो तेरी मुस्कान से मचलते हैं
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

अंधेरा हो जाता है तेरी पलकों के गिरने से
तेरी आंखों की लौ से आसमान में दिए जलते हैं
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तेरी चुनरी में जगह पाने को प्रिये!
सितारे आसमान से उतरते हैं
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तेरे गालों में रंग भरती है सुबह की लाली
फूल तेरे बदन की खुशबू बन महकते हैं
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

कितनी उपमाओं से उसे सजाऊं मैं
मुझे शब्द भी तेरे लिए उपमान सुझाने लगते हैं
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                        अचलाएसगुलेरिया

har har mahadev

"श्री शंकरः पातु माम्‌॥"
याचना करो तो  महादेव से करों...
मांगना है तो महादेव से मांगिए....
और देवता से क्या मांगना।
श्री और वैभव सम्पन्न महादेव हैं।
                  ...बापू*
                ।। विश्वास स्वरूपं ।।
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Good morning

सुख पाने के लिए केवल दौड़ना आवश्यक नहीं है, 
बल्कि आपकी दौड़ सही मार्ग पर है, ये पता होना.                                   जरूरी है।

कभी किसी का मंथन मत करना सेतु बनाना......बापू

उसने आज तक कोई सफाई नहीँ दी
आदमी सच्चा लगता है।
-भावेश पाठक
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Good morning

हर धड़कते पत्थर को,
लोग दिल समझते हैं....!
उम्र बीत जाती है,
दिल को दिल बनाने में....!!
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Good morning

हर धड़कते पत्थर को,
लोग दिल समझते हैं....!
उम्र बीत जाती है,
दिल को दिल बनाने में....!!
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Good evening

रुलाने के बाद मुझको, हंसाता भी बहुत है। 
वो मेरा इश्क है मुझे याद, आता भी बहुत है।                                      Shayaripub.com 

कभी कहता है कि रिश्ता, अब खतम हो चुका है, 
और जमाने में मुझे अपना, बताता भी बहुत है।                                 Shayaripub.com 

जिसने रक्खें थे कभी सोलह उपवास मेरी खातीर, 
वो आजकल मुझसे पीछा, छुड़ाता भी बहुत है।                             Shayaripub.com 

मुझे देखने की खातीर जो तड़पता बहुत था,
अब जाने क्यों वो नज़रें, चुराता भी बहुत है।                                     Shayaripub.com 

हर बात पर जिसके कभी, निकल आते थे आसूं, 
सुना है वो शख्स अब, मुस्कुराता भी बहुत है।
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have a wonderful time

बिखरी जाऊं लफ़्ज़ों में या.... शायरी में संवर जाऊं 
 कुछ यूं उतरु तुझमें कि ....तेरी हर बात में नजर आऊं.   

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Lol my k poo

Good evening

रुलाने के बाद मुझको, हंसाता भी बहुत है। 
वो मेरा इश्क है मुझे याद, आता भी बहुत है।                                      Shayaripub.in

कभी कहता है कि रिश्ता, अब खतम हो चुका है, 
और जमाने में मुझे अपना, बताता भी बहुत है।                                 Shayaripub.in 

जिसने रक्खें थे कभी सोलह उपवास मेरी खातीर, 
वो आजकल मुझसे पीछा, छुड़ाता भी बहुत है।                             Shayaripub.in

मुझे देखने की खातीर जो तड़पता बहुत था,
अब जाने क्यों वो नज़रें, चुराता भी बहुत है।                                     Shayaripub.in

हर बात पर जिसके कभी, निकल आते थे आसूं, 
सुना है वो शख्स अब, मुस्कुराता भी बहुत है।
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in