hindi kavita

दूर ही रहते हैं कुछ ख्वाब हकीकत से, 
हर ख्वाब मुक्कमल हो ज़रूरी तो नहीं ।
 दोस्त बन कर देतें है  जो अपनेपन का भरोसा ,
 यक़ीन कितना भी कर लो वो हम नवाँ   नहीं ।

छुपा के रखते हैं खंजर, आंखों में प्यार लिए फिरते हैं !
 वो मतलबी बहुत है, जुबां में चाशनी सही ।
डरते बहुत हैं हम  भी  मगर परहेज नहीं करते !
मीठे के शौकिन है लहू में शक्कर ही  सही ।

आदत में शुमार है  हर दर्द को पी जाना !
अपनी महरूमियों की अब कोई इंतहा  नहीं!
ग़म गैरों का भी हो अपना सा लगता है !
इंसान हैं अखिर हम भी, कोई पत्थर तो नहीं ।
                        रूमा गगन गुलेरिया
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Good morning

मतलबी बहुत हैं आंखों में प्यार लिए फिरते हैं 
छुपा के रखते हैं खंजर, जुबां में चाशनी सही!
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Kavita

*** मेरी कलम से *****

अपनी  अपनी जंग को खुद ही लड़ना पड़ता है !
वक़्त से दो चार होना ही पड़ता है ।।
यादों  के परिंदे जो चहकते हैं मुंडेर पर !
सब्र का दाना उन्हें खिलाना ही पड़ता है ।।
हिज्र का ये दोर भी कभी तो गुजर जाएगा !
मन को बार बार  यह समझाना ही पड़ता है।। 
धुंधली हो जाए जब उम्मीदों की चाँदनी  !
तन को मीरा मन को मोहन बनाना ही पड़ता है  ।।
यूँ ही नहीं फलता है सपनों का कोई चमन  !
 यहां जाड़े में भीगना, धूप में जलना ही पड़ता है  ।।
                  ................... रूमा गगन गुलेरिया.............
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Good morning

आंसू बहाने से कोई अपना नहीं होता..

जो अपना होता है, वो रोने कहां देता है...!!

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Good morning

अनगिनत ख़्वाहिशों पे सवार हैं हम, 

और फिर कहते हैं, परेशान हैं हम !
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Good morning

नमक जैसा किरदार बनाओ,ना कोई ज्यादा इस्तेमाल करे ,ना कोई आपके बिना रह सके ।।
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Good morning

"रात कभी सुबह का इंतज़ार नहीं करती"                                                       "खुशबू कभी मौसम का इंतज़ार नहीं करती".!                                                               
"जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लो",,                                                                                                                  "क्योंकि जिंदगी कभी वक़्त का इंतज़ार नहीं करती"..!                                                                                                         🌹    GoodMorning.     🌹
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Goodmorning

जिंदगी को लेकर हमारी शिकायतें जितनी कम होती जायेंगी। हमारा जीवन उतना ही बेहतर बनता जायेगा।                         shayaripub.in 


अमृता

प्रेम में डूबी हर स्त्री अमृता होती है या फिर होना चाहती है पर सबके हिस्से कोई इमरोज नहीं होता, शायद इसलिए भी कि इमरोज होना आसान नहीं।खासकर हमारी सामाजिक संरचना में एक पुरुष के लिए यह अच्छा खासा मुश्किल काम है कि किसी ऐसी स्त्री से से प्रेम करना और उस प्रेम में बंधकर जिन्दगी गुजार देना, जिसके लिए यह पता हो कि वह आपकी नहीं है।

एक बार अमृता ने इमरोज़ से कहा था -

" तुम मुझे जिंदगी की शाम में क्यों मिले,
मिलना था तो दोपहर में मिलते "

जब इमरोज और अमृता ने साथ साथ रहने का निर्णय लिया तो उन्होंने इमरोज से कहा था,

‘ एक बार तुम पूरी दुनिया घूम आओ
फिर भी तुम मुझे अगर चुनोगे
तो मुझे कोई उज्र नहीं
मैं तुम्हें यहीं इंतजार करती मिलूंगी ’ 

इसके जवाब में इमरोज़ ने उस कमरे के सात चक्कर लगाए और कहा, ‘हो गया अब तो...’ इमरोज के लिए अमृता का आसपास ही पूरी दुनिया थी।

उनके प्यार की समझदारी देखिये कि सालो तक एक ही घर में साथ रहने के बाद भी दोनों अलग अलग कमरों में रहते थे , इमरोज़ बताते है कि अमृता को रात में लिखने कि आदत थी क्योंकि उस वक़्त ना कोई आवाज़ होती थी ना फोन बजता और ना ही कोई आता जाता।

हालांकि लिखते समय उनको चाय चाहिए होती थी।अब लिखने में मशरूफ अमृता खुद तो उठकर चाय बना नहीं सकती थी तो इमरोज़ ने रात में 1 बजे उठना शुरू कर दिया।इमरोज़ चाय बनाते और चुपचाप उनके बगल में रख आते वो लिख़ने में इतनी खोई हुई रहती कि इमरोज़ की तरफ देखती भी नहीं थी ।और ये सिलसिला इसी तरह बदस्तूर चालीस- पचास सालों तक चलता रहा।

एक किस्सा बताते हुए इमरोज़ कहते है

एक बार जब वो अमृता को अपने स्कूटर पर बैठा कर कही जा रहे थे, तो पूरे रास्ते अमृता कि उंगलियां उनके पीठ पर कुछ लिख रही थी। इमरोज़ जानते थे वो शब्द साहिर का नाम था। वो कहते इस बात से उनको कोई नराज़गी नहीं थी ,वो बोले - मैं भी अमृता का, मेरी पीठ भी अमृता की।

इमरोज़ होना आसान नहीं, और मैने प्रेम में इमरोज़ होना चुना।

इसीलिए अमृता जी की अंतिम नज्म ‘मैं तुम्हें फिर मिलूंगी’ इमरोज़ के नाम थी, केवल इमरोज़ के लिए।

" मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं
शायद तेरे कल्पनाओं की प्रेरणा बन
तेरे केनवास पर उतरुँगी
या तेरे केनवास पर
एक रहस्यमयी लकीर बन
ख़ामोश तुझे देखती रहूँगी
मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं। " 

अमृता-इमरोज़ •

अमृता -इमरोज की पत्नी
और साहिर लुधियानवी अमृता का प्रेमी.....!!!

Good morning

हर इंसान बंधा है यहां हालात से
फिर भी जिंदगी कम नहीं किसी सौगात से
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Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in