Good morning

चलकर देखा है, अकसर

मैंने अपनी चाल से तेज.... 

पर वक्त और तकदीर से आगे
 
कभी निकल ना सके ।।
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Good morning

रहना तेरी यादों में
  आदत है मेरी,

कोई इसे इश्क कहता है
  पर हम कहते हैं 
   तू चाहत है मेरी।
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Good morning

विरोध किसी से रखो रखना क्यों है 
जलन करें और जलते रहें यह करना क्यों है 
सत्य अखंड है सत्य अमर है 
 सत्य निडर है 
तो किसी से डरना क्यों है
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Good morning

झूठ हमें कहना नहीं 
सच किसी को सहन नहीं
 इसलिए खामोशियों से
 दोस्ती बढ़ा ली है
         achlaguleria
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Good Night

प्रेम का आमंत्रण यह। 
तुम्हें खुला निमंत्रण यह।।
वेग है ,प्रवाह है ,इतना यह अथाह है,
सहता नहीं किसी का भी ।
वजूद पर नियंत्रण यह।।
           achlasguleria 
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Good morning

इंसान अपना वो चेहरा खूब सजाता है…
जिस पर लोगों की नज़र होती है…!

मगर आत्मा को सजाने की कोशिश नही करता,
जिस पर परमात्मा की नजर होती है…!
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Good morning

राह की धूप बहुत काम आई, 
छांव होती तो सो गए होते..!!
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विभीषण

पात्र अत्यंत विलक्षण हो जाना तटस्थ पुरुष दर्पण हो जाना*
            *आसान नहीं विभीषण हो जाना ।*

*महलों में योगी वह रहता 
सुख-दुख सब सम भाव से सहता*
      *हरिदर्शन करते-करते स्वयं एक दर्शन हो जाना ।।*

*सत्य पक्ष में ध्वजा धारी है 
बड़े भाई का आज्ञाकारी है 
कर्म धर्म से नीच भाई के आगे सदा नतमस्तक रहना ।।

पुलस्त्य कुल वंशी ज्ञान रूप सब ।
बने निशाचर अधम कुरूप अब
अतिदुश्कर  है  सबका .....पुनः सुमार्ग पर आना


रावण जब सीता हर लाया
 अग्रज को बहुत समझाया
कौन बचाए युद्ध से उसको जिसने निज विनाश हो ठाना

हनुमानको वैदेही का पता बता।
घर का भेदी होने का कलंक उठाया
परमार्थ कारण ध्वल चरित्र कलंकित कर लेना

वीर पुरुष ने महिपति को पंथ दिखाया
नीति विरुद्ध ना मारें दूत यह मंत्र समझाया
क्रोधी, मोही, दंभी  सभा में बिना डरे, अपना मत देना

  सन्मार्ग पर लाने का प्रयत्न किया था
युद्ध रोकने का हर संभव यत्न किया था
छोटे प्रयास का बड़े आरोप में दफन हो जाना

स्वाभिमान को तोड़ दिया अपने अपनों ने
ऐसा दुर्व्यवहार न सोचा था सपनों में
जगत से ठोकर खाकर प्रभु शरण में जाना

अगर ना होता विभीषण तो क्या लंका होती
पराधीन हो सारी जनता हर पल रोती
शत्रु के हाथों अपना राजतिलक करवाना

अश्रु धार से राम की मानस पूजा करते
अपने आपको हरि चरणों में अर्पित करके
श्रुति निंदा से मुक्त हो राम राम गुण गाना

असत्य हारा जब रावण हारा लंका ना हारी
  पा हरिभक्त नरेश सभी हर्षे नर नारी
पुरवासियों को राम नाम का मरम सिखाना
                              अचला शर्मा गुलेरिया
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Good morning

हमें तो तेरी सादगी
           ले डूबी...!!!*

       हुस्न क्या होता हैं
       खुदा ही जानें..!!
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एक कहानी

🌺 एक बोध कथा - ईश्वर बहुत दयालु है। 🌺
एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल होते थे और उस बगीचा की सारी देखरेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था. वह किसान हर दिन बगीचे के ताज़े फल लेकर राजा के राजमहल में जाता था।

एक दिन किसान ने पेड़ों पे देखा नारियल अमरुद, बेर, और अंगूर पक कर तैयार हो रहे हैं, किसान सोचने लगा आज कौन सा फल महाराज को अर्पित करूँ, फिर उसे लगा अँगूर करने चाहिये क्योंकि वो तैयार हैं इसलिये उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा!  किसान राजमहल में पहुचा, राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और नाराज भी लग रहा था किसान रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी और थोड़े दूर बेठ गया, अब राजा उसी खयालों-खयालों में टोकरी में से अंगूर उठाता एक खाता और एक खींच  कर किसान के माथे पे निशाना साधकर फेंक देता।

राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर  पर लगता था किसान कहता था, ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’ राजा फिर और जोर से* *अंगूर फेकता था किसान फिर वही कहता था ‘ईश्वर बड़ा दयालु है।

थोड़ी देर बाद राजा को एहसास हुआ की वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है वो सम्भल कर बैठा , उसने किसान से कहा, मै तुझे बार-बार अंगूर मार रहा हूँ , और ये अंगूर तुंम्हे  लग भी रहे हैं, फिर भी तुम यह बार-बार क्यों कह रहे हो की ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’।

किसान ने नम्रता से बोला, महाराज, बागान में आज नारियल, बेर और अमरुद भी तैयार थे पर मुझे भान हुआ क्यों न आज आपके लिये अंगूर् ले चलूं लाने को मैं अमरुद और बेर भी ला सकता था पर मैं अंगूर लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, बेर या बड़े बड़े अमरुद रखे होते तो आज मेरा हाल क्या होता ? इसीलिए मैं कह रहा हूँ कि  ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’!!

🌷 कथा सार 🌷
इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत  हल्का कर के हमें उबार लेता है पर ये तो हम ही नाशुकरे हैं जो शुकर न करते हुए उसे ही गुनहगार ठहरा देते हैं, मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ , मेरा क्या कसूर, आज जो भी फसल हम काट रहे हैं ये दरअसल हमारी ही बोई हुई है, बोया बीज बबूल का तो आम कहाँ से होये।। और बबुल से अगर आम न मिला तो  गुनहगार भी हम नहीं हैं , इसका भी दोष हम किसी और पर मढेंगे, कोई और न मिला तो ईश्वर तो है ही।

आज हमारे पास जो कुछ भी है अगर वास्तविकता के धरातल पर खड़े होकर देखेंगे तो वास्तव में हम इसके लायक भी नही हैं पर उसके बावजूद मेरे ईश्वर ने मुझे जरूरत से ज़्यादा दिया है और बजाय उनका धन्यवाद करने के हम उनहे हमेशा दोष ही देते रहते हैं। पर वो तो हमारा पिता है हमारी माता है किसी भी बात का कभी बुरा नहीं मानते और अपना आशीर्वाद हम पर बरसाते रहते है। अगर एक बार उनके तोहफों की तरफ देखेंगे तो सारी उम्र धन्यवाद दोगे तो भी कम पड़ेंगे।


Good morning ,shayaripub.in

मिली हैं रूहें तो
रस्मों की बंदिशें क्यूँ हैं 

यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है
*फिर रंजिशें क्यूँ हैं ।। .
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मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in