अचला की कलम से

कुछ याद नहीं कुछ भूल गए कुछ अभी भुलाना बाकी है🌹
सब रास्ते हैं याद शहर के ..उन पर चलकर घर तक जाना बाकी है।।🌹🌹

सौ गीत लिखे.. शब्दों को पिरोया नज़्मों में🌹
मन की सड़कों की कालिख से हर भाव भरा फिर नगमो में
जो आंख के पानी से हो लिखा वो एक तराना बाकी है।।🌹🌹

है शोर बहुत इस दुनिया में कोलाहल से भरा है जहां🌹
मन की आग बुझाने को ढूंढे दिल पानी यहां वहां
जो अमृत बरसाए जग में वो राग बनाना बाकी है।।🌹🌹
                                                  अचलाएसगुलेरिया
                                                  Shayaripub.in 

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प्यार भरी शायरी

ऐसा क्या लिखूँ की तेरे दिल को  तसल्ली हो जाए , क्या ये बताना काफी नहीं कि  मेरी  जिंदगी हो तुम