emotional shayari shayari,शायरी Goodmorning

⚘छू लूं तुम्हे की मेरी रूह का एहसास हो तुम⚘ 
⚘कोई नहीं अब सिर्फ दिल के पास हो तुम⚘
⚘जो हर पल छूकर गुजरे वो जज्बात हो तुम⚘ 
⚘तड़प रही जो कब से! धड़कनो की आवाज हो तुम⚘
 ⚘सुकून नहीं कहीं जैसे रूह"की प्यास हो तुम⚘ 
⚘जिस्म मे जो बची है वो आखिरी साँस हो तुम…..⚘
                                         विष्णु  
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#कश्यप अवतार#hindu#mythology#



 संपूर्ण सृष्टि प्रजापति कश्यप की संतान है देवता और दैत्य भी उन्हीं के पुत्र हैं
 परंतु तमोगुण स्वभाव और बलपूर्वक स्वर्ग प्राप्ति की आकांक्षा के कारण दैत्य प्रायः देवताओं पर आक्रमण करते रहते थे।
 इन युद्धों में विजय श्री कभी देवताओं की कभी दैत्यों का वरण करती थी ।⚘
बलि के दैत्याधिपति बनने पर दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया ।
पराजित निरूपाय देवता पितामह की शरण में गए पितामह ने वेद वाणी द्वारा भगवान श्री हरि की स्तुति की और उनसे देवताओं के कष्टों का निवारण करने की प्रार्थना की।
श्री हरि ने देवताओं को सलाह दी कि तुम लोग अपने बंधुत्व का स्मरण करा कर दैत्यों सेसंधि कर लो और अमृत का प्रलोभन देकर उनके साथ समुद्र मंथन करो।
इससे तुम्हें अमृत की प्राप्ति होगी जिसे पीकर तुम अमर हो जाओगे श्रीहरि की योजना के अनुसार देवताओं ने राक्षसों से संधि कर ली। अमृत पान के लिए वह भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए ।
  नागराज वासुकी ने नेति और मन्दराचल ने मथानी बनना स्वीकार  कर लिया।।
जब समुद्र मंथन प्रारंभ हुआ तो आधारहीन मंदराचल समुद्र में डूबने लगा यह देखकर भगवान श्री हरि ने एक लाख योजन विस्तृत पीठ वाले कच्छप का रूप धारण किया और मन्दर गिरी को अपने पीठ पर धारण कर समुद्र मंथन का कार्य सुचारू रूप से संपादित किया इस प्रकार देवताओं की हित के लिए उन परम प्रभु ने कच्छप अवतार लिया।
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           कल्याण के सौजन्य से 

#वराहावतार# avatars#

                   वराहावतार की कहानी 


 श्वेतवाराहकल्प  की बात है, परम पराक्रमी दितीपुत्र हिरण्याक्ष पृथ्वी को लेकर रसातल में चला गया।
 इससे चिंतित होकर पितामह ब्रह्माजी ने भगवान श्री हरि का मन ही मन शरण किया।
स्मरण करते ही भगवान उनके नासिका छिद्र से वाराह शिशु के रूप में निकल पड़े और देखते ही देखते उन्होंने विशाल पर्वत आकार श्वेत बराह का रूप धारण कर लिया और समुद्र के जल में प्रवेश किया और रसातल में पृथ्वी को लाने लगे।
यह देखकर हिरण्याक्ष क्रुद्ध होकर गदा लेकर उनसे युद्ध करने लगा परंतु उन वाराह रूप धारी श्री हरि ने उसे लीला पूर्वक अपने हाथ के प्रहार से मार डाला और पृथ्वी को पुनः अपनी जगह पर प्रतिष्ठित कर दिया।
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emotional shayari#love#

⚘किस्मत बुरी या मैं बुरा⚘
⚘यह फैसला हो ना सका⚘⚘
⚘मैं हर किसी का हो गया⚘
⚘कोई मेरा ना हो सका।।⚘⚘
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emotional shayari

⚘लहजे की उदासी कम होगी बातों में खनक आ जाएगी⚘ ⚘⚘दो-रोज़ हमारे साथ रहो चेहरे पे चमक आ जाएगी।⚘⚘Shayaripub.com ⚘⚘

emotional shayari#love#

💐कुछ कहना है चुपके से तुम्हें ! फिर इश्क दोबारा कर लें क्या?
💐तेरे गालों के उस डिम्पल का,हम फिर से नजारा कर लें क्या
💐तेरे हंसने से जो मारे हमें ..तेरे चेहरे के उस बवंडर का
💐अपनी गजलों के होंठों से फिर जिक्र तुम्हारा कर दें क्या
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emotional shayari

नज़र वही जो क़त्ल...
   को पूरा अंजाम दे...
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      और चाहत वही है जो...
           भरी महफ़िल में सलाम दे..

emotional shayari मेरी रचना# poem# love#

⚘दशकों पहले ऐसे ही होते थे राजा रानी⚘

आज मन है लिखें वो अनकही कहानी
जिसमें एक था ख्वाबों का राजा एक थी सपनों की रानी
आज मन है लिखें वह अनकही कहानी.....l

देखना उसे ,सोचना उसे और अकेले मुस्कुराना
कभी कर दे वो इजहार तो चुपके से मुकर जाना
उंगली दबा के दाँतों में आंखें उससे चुरानी
आज मन है लिखें वो अनकही कहानी

सहेलियों से सुनाना किस्से अपने प्यार के
अपने इंकार के उसके इजहार के
तब एक जैसी होती थी सभी की जवानी
आज मन है लिखें वो अनकही कहानी

विश्वास भी भरोसा भी इश्क भी उसी से
छुपा के रखते थे तस्वीर उसकी, हर किसी से
उसके ख्वाबों की सैरगाह  में थी जिंदगी  सुहानी
आज मन है लिखें वो अनकही कहानी

शाम ढलते ही उसका सर्द सड़क पर टहलना
मेरा पीछे पीछे चल के उसकी परछाइयां पकड़ना
उसका खामोशी  मेरी पढ़ना, और कहना मुझे दीवानी
आज मन है लिखें वो अनकही कहानी

बहुत याद भी करें तो अब याद नहीं हमें
किस मोड़ पर मुड़े हम ...और छोड़ गए तुम्हें
अभी  तक दिल के कोने में सुलगती हैं वह यादें पुरानी
आज मन है लिखें वो अनकही कहानी

⚘⚘दशकों पहले ऐसे ही होते थे राजा रानी⚘⚘
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उसकी  यादों  को भुलाते हुए डर  लगता है
इन  चिराग़ों  को  बुझाते   हुए  डर लगता है..
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मैं मरूँगा तो नहीं तुम से बिछड़ कर लेकिन
ज़हर  कैसा  भी हो  खाते  हुए डर लगता है.. 
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बात  सपनों    भी  रहती थी  जारी जिससे
अब    फ़ोन  लगाते   हुए  डर  लगता है..
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उसने  जिस शर्ट  में सीने से लगाया था मुझे
मुझको  वो  शर्ट  धुलाते  हुए  डर  लगता  है 
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तुमने जिस नोट पे चाहत से लिखा था 'मेरा नाम 
मुझको  वो  नोट  चलाते  हुए  डर  लगता  है 
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दिल की शाखों  से  मुहब्बत  के  परिंदे ''राज''
अपने   हाथों   से  उड़ाते   हुए  डर   लगता  है
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...