good morning

तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।

तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
सम्भावनाओं से घिरे हैं,
हर दिवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा
पहाड़ गुज़र सकता है।
               सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 
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सुप्रभात, राम राम

अचलाएसगुलेरिया कृत.....
ऐसे साथ निभा मन मेरे.. राम नाम गुण गाने दे
जीवन है अनमोल रे मनवा ...इस को सफल बनाने दे

हरि नाम में डूब जा मनवा शरणागत हो जा हरिका
उसके नाम की माला जप ले तोड़ दे हर बंधन जग का
सारे बंधन तोड़ के मुझको राम शरण में जाने दे ।।
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे

सुख दुख हो या हंसना रोना सब कुछ तेरी माया है
इसमें उलझ के मिट जाएगी यह जो कंचन काया है
उदासीन करके जग से मुझे चिदानंद तक जाने दे
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे

तू जो प्रेम करेगा हरि से हरि मुझे मिल जाएंगे
सब प्रपंच छोड़ जग के हम हरी नाम गुण गाएंगे
प्रभु से जन्म जन्म का रिश्ता निष्ठा से मुझे निभाने दे
ऐसे साथ निभा मन मेरे राम नाम गुण गाने दे....
जीवन है अनमोल रे मनवा इस को सफल बनाने दे 
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Good morning, beta

वो दूर जाता है तो घबरा जाती हूँ
जाने कैसे कैसे दिल को समझाती हूँ
फोन करती हूँ बार बार...
वो तंग हो जाता है!
खुश हूँ कहता है ,आंसू भी छुपाता है
खाना खा लेता हूँ भरोसा दिलाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता 
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beta,my son

मुझे कुछ न कुछ सुनाता है
अपनी बात जिद से मनवाता है
कभी गलत को सही
सही को गलत ठहराता है
मेरा दिमाग गर्म करके ही
गर्म गर्म खाना खाता है
गलत कोई भी हो
वो मुझ पर ही चिल्लाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
मुझे मेरे होने का अहसास दिलाता है

कमरे को प्लेटफार्म (रेल) बना देता है
किताबों जुराबों की मण्डी सजा सजा देता है
English गाने सुनते सुनते गर्दन बहुत हिलाता है
जाने फिरंगी शब्दो को कितना समझ पाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है 
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my son, बेटा

मुझे कुछ न कुछ सुनाता है
अपनी बात जिद से मनवाता है
कभी गलत को सही
सही को गलत ठहराता है
मेरा दिमाग गर्म करके ही
गर्म गर्म खाना खाता है
गलत कोई भी हो
वो मुझ पर ही चिल्लाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है
मुझे मेरे होने का अहसास दिलाता है
कमरे को प्लेटफार्म (रेल) बना देता है
किताबों जुराबों की मण्डी सजा सजा देता है
English गाने सुनते सुनते गर्दन बहुत हिलाता है
जाने फिरंगी शब्दो को कितना समझ पाता है
वो जो मुझे माँ कह के बुलाता है 

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good morning

दर्द एक संकेत है कि
आप जिंदा हो
समस्या एक संकेत है कि 
आप मजबूत हो
दोस्त और परिवार एक संकेत है कि
आप अकेले नहीं हो

शक्कर को चाहे अंधेरे में खाएं या उजाले में, मुँह मीठा ही होता है।

उसी प्रकार अच्छे कर्मों को  हम अनजाने में भी करें, तो भी उसका फल मीठा ही होताहै। 
       

good morning, सुप्रभात

आज बुरा है! तो डर मत,
कल अच्छा आयेगा...
वक़्त ही तो है, रुक थोड़ी जायेगा..!!

दर्द एक संकेत है कि
आप जिंदा हो
समस्या एक संकेत है कि 
आप मजबूत हो
दोस्त और परिवार एक संकेत है कि
आप अकेले नहीं हो
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Goodmorning

सुखी होने में ज्यादा खर्च नहीं होता,लेकिन हम कितने सुखी हैं, ये लोगों को  दिखाने में बहुत खर्च होता है।।
मेरी कथा का एक हेतु है ....आपका चित्त प्रसन्न हो.... 

मैं मोक्ष बांटने नहीं निकला हूँ ... मैं प्रसन्नता बांटने के लिए निकला हूँ ....आप प्रसन्न रहो ....क्यों इतने सीरियस हो ?....

मैं जगत की इतनी बदनामियाँ मेरे सिर का मुकुट बना कर बैठा हूँ ....फिर भी उसी मार्ग पर चल रहा हूँ ..... कभी ये गांव ...कभी ये गांव ....कभी ये गांव....
मतलब क्या ?....आपकी चैत्सिक प्रसन्नता.... क्योंकि आदि शंकर ने हमें बताया प्रसन्न चित्ते परमात्म दर्शन..... भगवान का दर्शन करना है तो तुम्हारा चित्त प्रसन्न हो.....
बापू
मानस रामरक्षा 
जय सियाराम

have a great time,shayari

शेरो-शायरी तो महज...
दिल बहलाने का ज़रिया है साहब !
लफ़्ज़ कागज पर उतारने से.. 
गुजरे हुए पल नहीं लौटा करते !!
                Dev
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कौन कहता है कि कुछ नहीं 
तेरे मेरे दरमियाँ...

वो एहसासों का हुजूम,
वो जज़्बातों का सैलाब,,

वो अनकही बातें,
वो अनछुए अरमाँ,,

बिखरी सी ख़्वाहिशें,
फैले से ख़्वाब,,

वो सुकूँ के बिछे गलीचे,
वो ख़यालातों के बगीचे,,

वो महकती हुई साँसें,
उम्मीदों की मुस्कान,,

कौन कहता है कि कुछ नहीं 
तेरे मेरे दरमियाँ...
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Good morning

ज़िंदगी में जब आएं खुशियां तो खाना तुम मिठाई की तरह...
.मुमकिन है गम भी आएंगे 
      तो उन्हें भी  स्वीकार लेना दवाई की तरह ।।                                                             🌹shayaripub.com 🌹


एक कहानी



*कमाई की परिभाषा सिर्फ धन से ही तय नही होती*

*लेकिन.....*

*रिश्ते, सन्मान, तजुर्बा, प्रेम और सेवा से ही कमाई की परिभाषा तय होती है*

   *🌺जय सियाराम🌺*


अगर मेंढक को गर्म उबलते पानी में डाल दें तो वो छलांग लगा कर बाहर आ जाएगा.. परन्तु उसी मेंढक को अगर सामान्य तापमान पर पानी से भरे बर्तन में रख दें और पानी धीरे धीरे गरम करने लगें तो क्या होगा ?
मेंढक फौरन मर जाएगा ?
जी नहीं....
ऐसा बहुत देर के बाद होगा...
दरअसल होता ये है कि जैसे जैसे पानी का तापमान बढता है, मेंढक उस तापमान के हिसाब से अपने शरीर को Adjust करने लगता है।
पानी का तापमान, खौलने लायक पहुंचने तक, वो ऐसा ही करता रहता है।अपनी पूरी उर्जा वो पानी के तापमान से तालमेल बनाने में खर्च करता रहता है लेकिन जब पानी खौलने को होता है और Boiling Point तक पहुंच जाता है, तब मेंढक अपने शरीर को उसके अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है, और अब पानी से बाहर आने के लिए, छलांग लगाने की कोशिश करता है।
लेकिन अब उसके लिए ये मुमकिन नहीं हो पाता है..क्योंकि अपनी छलाँग लगाने की क्षमता के बावजूद , मेंढक ने अपनी सारी ऊर्जा वातावरण के साथ खुद को Adjust करने में खर्च कर दी है। अब पानी से बाहर आने के लिए छलांग लगाने की शक्ति, उस में बची ही नहीं I वो पानी से बाहर नहीं आ पायेगा, और मारा जायेगा I
मेढक क्यों मर जाएगा ?
कौन मारता है उसको ?
पानी का तापमान ?
गरमी ?
या उसके स्वभाव से ?
मेंढ़क को मार देती है, उसकी असमर्थता...
सही वक्त पर सही फैसला न लेने की अयोग्यता । यह तय करने की उसकी अक्षमता कि कब पानी से बाहर आने के लिये छलांग लगा देनी है।
इसी तरह हम भी अपने वातावरण और लोगो के साथ सामंजस्य बनाए रखने की तब तक कोशिश करते हैं, जब तक की छलांग लगा सकने की हमारी सारी ताकत खत्म नहीं हो जाती ।
लोग हमारे तालमेल बनाए रखने की काबिलियत को कमजोरी समझ लेते हैं। वो इसे हमारी आदत और स्वभाव समझते हैं। उन्हें ये भरोसा होता है कि वो कुछ भी करें, हम तो Adjust कर ही लेंगे और वो तापमान बढ़ाते जाते हैं।
हमारे सारे इंसानी रिश्ते, राजनीतिक और सामाजिक भी, ऐसे ही होते हैं, पानी, तापमान और मेंढक जैसे। ये तय हमे ही करना होता है कि हम जल मे मरें या सही वक्त पर कूद निकलें

Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in