..शुभ प्रभात
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
सुप्रभात, good morning
अपनी मंजिल का रास्ता,दूसरों से पूछोगे तो भटक जाओगे,क्यूँकि आपकी मंजिल की अहमियत,जितनी आप जानते हो उतनी और कोई नहीं जानता…
Good morning
इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा,
यादें कटती हैं ले ले कर नाम तेरा,
दोपहर से बैठे रहते हैं यह आस पाले,
कि कब आएगा पैगाम तेरा,...
Shayaripub.com.
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो
कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
NnShayaripub.in
Good morning
एक ग़लती हर रोज़ कर रहे हैं हम,,
जो मिलेगा ही नहीं उस पे मर रहे हैं हम..
एक स्त्री हूँ,
सच है कि मैं,
पावन हूँ तुलसी सी,
पर कभी कभी,
गुलमोहर सी,
हो जाना चाहती हूँ,
कुछ खिली खिली सी,
कुछ नारंगी सी ,
रंगत लिऐ ,
बिना किसी ,
उद्देश्य के ,
मस्त हो जाना
चाहती हूँ।
मैं एक स्त्री हूँ,
सच है कि मैं,
महकती हूँ बेला सी,
पर कभी कभी ,
गुलाब होना चाहती हूँ,
खुशबू तो हो मुझमें,
रंगत भी प्यारी हो ,
पर कुछ कांटो की ,
तरह थोङा थोङा सा,
चुभना चाहती हूँ।
मैं एक स्त्री हूँ,
सच है कि मैं,
रोशन हूँ चाँद सी,
पर कभी कभी,
मैं बादल सी ,
अंधियारी ,
होना चाहती हूँ,
चमक कर,
थोङी थोङी,
बिजली सी,
बिन कारण ,
बरसना चाहती हूँ ...
Good morning
मेरी बेकसूरी मेरा कसूर बन गया,
जिसे पाला जिगर के लहू से,वो रिश्ता
कसम से
नासूर बन गया।
और जिसे ताउम्र शैतान ही समझा,
वो कुछ ऐसा कर गया ...
जिसे पाला जिगर के लहू से,वो रिश्ता
कसम से
नासूर बन गया।
और जिसे ताउम्र शैतान ही समझा,
वो कुछ ऐसा कर गया ...
...कि हजूर बन गया ।।
good morning
हम सबको को मानते हैं अपना
हमें अपना ,अंपना सिर्फ़ तुम मानते हो ✍
मेरी मुस्कान पर फिदा है जमाना सारा
मेरे गुमनाम जख्मों का पता तुम जानते हो ✍ अचला का असला. shayaripub.com.
हमें अपना ,अंपना सिर्फ़ तुम मानते हो ✍
मेरी मुस्कान पर फिदा है जमाना सारा
मेरे गुमनाम जख्मों का पता तुम जानते हो ✍ अचला का असला. shayaripub.com.
दिल शायराना
अचलाएसगुलेरिया की लेखनी से....
तेरा मोबाइल हो जाएं हम अक्सर सोचा करते हैंमुझसे ज्यादा तू उसको चाहे यही सोच कर जलते हैं
मेरी जगह वह ले बैठा, तुम उसे देखते रहते हो
हंसना रोना साथ है उसके ,साथ उसी के चलते हो
मुझे यह रिश्ते मोबाइल वाले तेरे बहुत ही खलते हैं
हंसना रोना साथ है उसके ,साथ उसी के चलते हो
मुझे यह रिश्ते मोबाइल वाले तेरे बहुत ही खलते हैं
जेब कभी हाथ कभी तेरे गालों से सटा रहे
पैटर्न रोज बदल कर इसके हमसे क्या क्या छुपा रहे
इसकी एक आवाज से तेरे सौ-सौ ख्वाब मचलते हैं
पैटर्न रोज बदल कर इसके हमसे क्या क्या छुपा रहे
इसकी एक आवाज से तेरे सौ-सौ ख्वाब मचलते हैं
बीवी की तरह ,मीठी आवाज से रोज जगाए है
सोचे तू इसे नचाए है पर यह तूझे नचाए है
सिग्नल के आने जाने से सौ सौ मूड बदलते हैं
सोचे तू इसे नचाए है पर यह तूझे नचाए है
सिग्नल के आने जाने से सौ सौ मूड बदलते हैं
good morning, सुप्रभात
थोड़ा पानी विश्वास का उबालिये,
खूब सारा दूध ख़ुशियों का थोड़ी पत्तियां ख़यालों की,
थोड़े गम को कूटकर बारीक..
हँसी की चीनी मिला दीजिये,
उबलने दीजिये ख़यालों कुछ देर तक,
यह ज़िंदगी की चाय है जनाब
इसे तसल्ली के कप में
छानकर घूंट घूंट कर पीने का मज़ा लीजिये ।।
Shayaripub.in
Good night
जिंदगी वहीं लौटना चाहती है,
जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं होता,
बचपन..... मासूमियत
*पुराना घर... पुराने दोस्त...!!
Good morning
सुख तीन बार आता है
पहले "उम्मीद"बन कर...
फिर "सांत्वना"बन कर...
और अंत में "समझौता" बन कर ....
*आज की कहानी*
💐💐💐💐💐💐
https://chat.whatsapp.com/Ir1RTpmkn9uGXAubW9gQ1l
*,,,नालायक बेटा,,*
👇👇👇
"बेटा , हमारा एक्सीडेंट हो गया है ।मुझे ज्यादा चोट नहीं आई पर तेरी माँ की हालत
गंभीर है।
कुछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खून चढ़ाना है।"बासठ साल के माधव जी ने अपने बड़े बेटे से फोन पर कहा।
"पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल।मेरा आना नहीं हो सकेगा।मुझे विदेश मे नौकरी का पैकेज मिला है तो उसी की तैयारी कर रहा हूँ।आपका भी तो यही सपना था ना? इसलिये हाथ भी तंग चल रहा है।पैसे की व्यवस्था कर लीजिए मैं बाद मे दे दूँगा।"उनके बडे़ इंजिनियर बेटे ने जबाब दिया।
उन्होनें अपने दूसरे डाॅक्टर बेटे को फोन किया तो उसने भी आने से मना कर दिया । उसे अपनी ससुराल में शादी मे जाना था।
हाँ इतना जरुर कहा कि पैसों की चिंता मत कीजिए मैं भिजवा दूँगा।
यह अलग बात है कि उसने कभी पैसे नहीं भिजवाए।
उन्होंने बहुत मायूसी से फोन रख दिया।अब उस नालायक को फोन करके क्या फायदा।
जब ये दो लायक बेटे कुछ नहीं कर रहे तो वो नालायक क्या कर लेगा?
उन्होंने सोचा और बोझिल कदमों से अस्पताल में पत्नी के पास पहुंचे और कुर्सी पर ढेर हो गये।पुरानी बातें याद आने लगे,
माधव राय जी स्कूल मे शिक्षक थे।उनके तीन बेटे और एक बेटी थी।बड़ा इंजिनियर और मझला डाक्टर था।दोनों की शादी बड़े घराने में हुई थी।दोनो अपनी पत्नियों के साथ अलग अलग शहरों में
रहते थे।
बेटी की शादी भी उन्होंने खूब धूमधाम से की थी।
सबसे छोटा बेटा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाया था।ग्यारहवीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और घर में ही रहने लगा।
कहता था मुझे नौकरी नहीं करनी अपने माता पिता की सेवा करनी है पर मास्टर साहब उससे बहुत नाराज रहते थे।
उन्होंने उसका नाम नालायक रख दिया था ।दोनों बड़े भाई पिता के आज्ञाकारी थे पर वह गलत बात पर उनसे भी बहस कर बैठता था। इसलिये माधव जी उसे पसंद नही करते थे।
जब माधव जी रिटायर हुए तो जमा पुँजी कुछ भी नही थी।सारी बचत दोनों बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटी की शादी मे खर्च हो गई थी।
शहर में एक घर , थोड़ी जमीन और गाँव में थोडी सी जमीन थी।घर का खर्च उनके पेंशन से चल रहा था।
माधव जी को जब लगा कि छोटा सुधरने वाला नही तो उन्होंने बँटवारा कर दिया और उसके हिस्से की जमीन उसे देकर उसे गाँव में ही रहने भेज दिया। हालाँकि वह जाना नहीं चाहता था पर पिता की जिद के आगे झुक गया और गाँव में ही झोपड़ी बनाकर रहने लगा।
माधव जी सबसे अपने दोनो होनहार और लायक बेटों की बड़ाई किया करते।उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था।
पर उस नालायक का नाम भी नहीं लेते थे।
दो दिन पहले दोनों पति पत्नी का एक्सीडेन्ट हो गया था । वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी अस्पताल मे भर्ती थे।डाॅक्टर ने उनकी पत्नी को आपरेशन करने को कहा था
"पापा, पापा!" सुन कर तंद्रा टुटी तो देखा सामने वही नालायक खड़ा था।उन्होंने गुस्से से मुँह फेर लिया।
पर उसने पापा के पैर छुए और रोते हुए बोला "पापा आपने इस नालायक को क्यों नहीं बताया? पर मैने भी आप लोगों पर जासूस छोड़ रखे हैं।खबर मिलते ही भागा आया हूँ।"
पापा के विरोध के वावजूद उसने उनको एक बड़े अस्पताल मे भरती कराया।
माँ का आपरेशन कराया ।अपना खून दिया । दिन रात उनकी सेवा में लगा रहता कि एक दिन वह गायब हो गया।
वह उसके बारे मे फिर बुरा सोचने लगे थे कि तीसरे दिन वह वापस आ गया।महीने भर में ही माँ एकदम भली चंगी हो गई।
वह अस्पताल से छुट्टी लेकर उन लोगों को घर ले आया। माधव जी के पूछने पर बता दिया कि खैराती अस्पताल था पैसे नहीं लगे हैं।
घर मे नौकरानी थी ही।वह उन लोगों को छोड़ कर वापस गाँव चला गया।
धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।एक दिन यूँ ही उनके मन मे आया कि उस नालायक की खबर ली जाए।
दोनों जब गाँव के खेत पर पहुँचे तो झोपड़ी में ताला देख कर चौंके।
उनके खेत मे काम कर रहे आदमी से पूछा तो उसने कहा "यह खेत अब मेरे हैं।"
"क्या?पर यह खेत तो...." उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ।
"हाँ।उसकी माँ की तबीयत बहुत खराब थी। उसके पास पैसे नहीं थे तो उसने अपने सारे खेत बेच दिये। वह रोजी रोटी की तलाश में दूसरे शहर चला गया है।बस यह झोपडी उसके पास रह गई है।यह रही उसकी चाबी।"उस आदमी ने कहा।
वह झोपड़ी मे दाखिल हुये तो बरबस उस नालायक की याद आ गई।
टेबल पर पड़ा लिफाफा खोल कर देखा तो उसमे रखा अस्पताल का नौ लाख का बिल उनको मुँह चिढ़ाने लगा।
उन्होंने अपनी पत्नी से कहा - "जानकी तुम्हारा बेटा नालायक तो था ही झूठा भी है।"
अचानक उनकी आँखों से आँसू गिरने लगे और वह जोर से चिल्लाये -"तूँ कहाँ चला गया नालायक,
अपने पापा को छोड़ कर।एक बार वापस आ जा फिर मैं तुझे कहीं नही जाने दूँगा।"
उनकी पत्नी के आँसू भी बहे जा रहे थे।
और माधव जी को इंतजार था अपने नालायक बेटे को अपने गले से लगाने का।
सचमुच बहुत नालायक था वो।
ये कहानी पढ़ते वक्त अगर आँखें नम हुई तो समझो हमारे अंदर भी एक ऩालायक है,,,
*
Good morning
अचला की कलम से.....
जब कभी गर्दिश में डूबा सितारा
कर गया हर कोई हमसे किनारा
उसका सहारा बनेंगे सदा
जिसने दिया गर्दिश में सहारा
कर गया हर कोई हमसे किनारा
उसका सहारा बनेंगे सदा
जिसने दिया गर्दिश में सहारा
Shayaripub.in
मैं हर्फ़ हर्फ़ बिखरी हूँ
जब भी खोलोगे ये क़िताब
मैं याद आऊँगी ...
बरसात की हर बूँद में
मिलूँगी बरसती मैं...
कभी बारिशों में भीगोगे
तो याद आऊँगी....
तेरी साँस-साँस में..
बसेरा है मेरा...
सुनोगे सांसों का संगीत
तो समझ जाओगे..
लम्हा लम्हा मैं भी
तेरी याद में तपती हूँ
खुद को खुद से खफा पाओगे
तो जान जाओगे
मैं पल पल ....
रब से तेरी खुशी मांगती हूँ
तुम जब हाथ दुआ में उठाओगे
तो याद आऊँगी.....
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
Good morning,#shayaripub.in
मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको Shayaripub.in
-
जग तो देखे महज प्रस्तुतीकरण तुम्हारा ईश्वर सदा ही देखे अंतः करण तुम्हारा धर्म-कर्म सब उसको अर्पित कर दो अपने सहज भाव से पूरे हो...
-
वो हमारे दिल से निकलने का रास्ता भी नहीं ढूंढ सके जो कहते थे.. तुम्हारी रग रग से वाकिफ हैं हम.. Shayaripub.in