Good morning



तुम्हारे इश्क़ को कैसे समेटू अल्फाज़ो में 
ये मोहब्बत मुझे नि:शब्द कर जाती हैं

साँवली लैला भी मजनू को ना दी दुनियाँ ने
मेरी वाली की रंगत तो खासी बेहतर है
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#हमारा समाज

अचलाएसगुलेरिया की कलम से

चार लोगों से बना हमारा यह समाज है 
चार लोग बोलते हैं चारों की आवाज है 

मेरे खान पान को चार लोग देखते 
मेरी बोल चाल को चार लोग तोलते 
मुझ में कृष्ण कंस को चार लोग खोजते
सीता मीरा राधा ••••••से भी यह नाराज है

 आगे बढ़ने वाले का उत्साह कभी बढ़ाते हैं 
पीठ पीछे बैठकर बातें कभी बनाते हैं
 मुसीबत में अपना बना हाथ भी बढ़ाते हैं
पर हर किसी में रहता छोटा सा दगाबाज है
 
चार लोगों ढूंढेंगे चारों को बताएंगे
 मेरे काम आना हम तेरे काम आएंगे
 साथ तो निभाएंगे बातें ना बनाएंगे
 नई विचारधारा का हो रहा आगाज है
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Good morning,shayaripub.in

ज़िंदगी ऐसे ही नहीं संवरती है,,,,,  कई सुख और दुःख की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं,,,,,,  तब जाकर खुशियों की छत नसीब होती है।                 Sh...