love# emotional shayar#i

मोहब्बत सिर्फ़ दो जिस्मों की दास्तां नहीं साहब......

ये एक रुह पर एक रुह के फ़ना होने की कहानी है....shayaripub.com 

#जय# सीयाराम#

⚘नाह नेहु नित बढ़त बिलोकी।⚘ 
⚘हरषित रहति दिवस जिमि कोकी॥⚘
⚘सिय मनु राम चरन अनुरागा। ⚘
⚘अवध सहस सम बनु प्रिय लागा॥ ⚘

अर्थ:-स्वामी का प्रेम अपने प्रति नित्य बढ़ता हुआ देखकर सीताजी ऐसी हर्षित रहती हैं, जैसे दिन में चकवी! सीताजी का मन श्री रामचन्द्रजी के चरणों में अनुरक्त है, इससे उनको वन हजारों अवध के समान प्रिय लगता है॥ 

                     श्री रामचरित मानस 
                      अयोध्याकांड (१३८) 
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emotional shayari



राज जी के अल्फाज़ 
बात आपसे क्या हुई, बीमार को दवा मिल गई।
शुष्क बेजान सांसों को, ताजा हवा मिल गई।

कबसे खड़ी थी आहें, पलकें बिछाए राहों पर
महज़ आहट ही से आपकी, रातें जवां मिल गई।

खिल गया गुलाब कोई, लब-ए-रुख़्सार पर मेरे
ठहरी सी जि़ंदगानी को, रौनके फि़जा़ मिल  गई।

आपकी  याद का मौसम, अब मुझ पर छा गया
इस बीमार-ए-दिल को, फिर से दवा मिल गई।

एक दस्तक रह गयी दरमियां, बस मेरे और तुम्हारे
शेष बस इतना जुनून-ए-इश्क़ को सज़ा मिल गई।

हरे कृष्ण

आपकी तारीफ  कर सकूं, 
मेरे शब्दों में इतना ज़ोर नहीं

बस इतना कहता हूं स्वामी 
कि तुम जैसा कोई और नहीं.।।
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emotional shayari

                    ⚘मुझे फुर्सत ही कहाँ कि
                            मौसम सुहाना देखूँ,⚘
                            
                           ⚘तेरी यादों से निकलूँ
                              तभी तो जमाना देखूँ।⚘
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emotional shayari

⚘मुझे फुर्सत ही कहाँ कि
मौसम सुहाना देखूँ,⚘
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⚘तेरी यादों से निकलूँ
तभी तो जमाना देखूँ।⚘
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jai siyaram

छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु।
करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु॥ 

अर्थ:-क्षण-क्षण पर श्री सीता-रामजी के चरणों को देखकर और अपने ऊपर उनका स्नेह जानकर लक्ष्मणजी स्वप्न में भी भाइयों, माता-पिता और घर की याद नहीं करते॥ 

                           श्री रामचरित मानस 
                           अयोध्याकांड (१३८) 


#friends#emotionalshayari#

⚘इज़्ज़त मांगी नही जाती साहब...
            इज़्ज़त तो कमाई जाती है.....⚘
                           और,
⚘दोस्ती सिर्फ खुशी में शरीक होना नही....
      ये हर मुश्किल,हर गम में निभाई जाती है.....⚘
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emotional shayari

छोड़ो ये बहस और तकरार की बातें
ये बताओ रात को आज सपने में क्यूँ नहीं आये..!!
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दिखने की चीज़ है न दिखाने की चीज़ है
उल्फ़त तो यार दिल से निभाने की चीज़ है

बेशक है धन ज़रूरी गुज़ारे के वास्ते
इज़्ज़त भी यार जग में कमाने की चीज़ है

कर के भलाई पल में जताते हो किसलिए
नेकी तो यार कर के भुलाने की चीज़ है

रहने दो राज़ कोई तो सीने में दफ़्न तुम
हर बात कब किसी को बताने की चीज़ है

यारों मत नुमाया इबादत को कीजिये
नामे रब तो दिल में बसाने की चीज़ है

                             हिन्दी शायरी दिल से 

emotional shayari#trurh#

सुनील. कुमार मेहता जी की कलम से 

अब sms से ही  हो जाते दिली इज़हार
खतों से इज़हारे दिल जाने ज़माना हो गया 

उनकी नाज़ुक उंगलियों से पकडी कलम से पिरोए मोती 
खतों में देखे भी ज़माना हो गया 

वक्त ने ली है ऐसी करवटें 
कि ख़त का बेसब्री से इंतजार करती 
धड़कन का एहसास किये भी ज़माना हो गया 
    .......Shayaripub.in



emotional shayari

⚘⚘मैंने हक दिया है तुझको मेरे साथ दिल्लगी का, ⚘⚘

⚘⚘मेरे दिल से खेल जब तक तेरा दिल बहल न जाये।⚘⚘
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...