खून के रिश्तो में ही होती है गर्मी
मौका वेमौका आजमा कर देख लो
जीत जाओगे जमाने को साहब
बस सिर को थोड़ा झुका कर देख लो
इश्क की गहराई समझ जाओगे
किसी फकीर से नजरें मिला कर देख लो
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
Good Night, gajal
मेरी वादा खिलाफियां तू नजरअंदाज करता था .
.तेरी इसी अदा पर..तेरा मोहताज होना चाहिए था
बहुत रोए तेरे कूचे से कूच करने के बाद
पर शायद... बिछड़ते वक़्त रोना होना चाहिए था
मेरी बेवफाई पर ..जो चुप है ..
उसे हक जता अपना ..नाराज होना चाहिए था
मेरा हाल पूछते हो ..बेगानों की तरह
तुम्हें तो सब मालूम होना चाहिए था
बड़ी उम्र तजुर्बा बड़ा है... तो साहब
सिर्फ मेरे नहीं ...बड़ों के काम आना चाहिए था
अनकही कहानियां ..इश्क में नाकामियां..
दफन किसों की ...कब्र पर
दिया जलाना चाहिए था
मेरे दिए फूलों को ...मसल भी सकते थे ..
धागा पिरो इन में ..
. न मसला बनाना चाहिए था
.तेरी इसी अदा पर..तेरा मोहताज होना चाहिए था
बहुत रोए तेरे कूचे से कूच करने के बाद
पर शायद... बिछड़ते वक़्त रोना होना चाहिए था
मेरी बेवफाई पर ..जो चुप है ..
उसे हक जता अपना ..नाराज होना चाहिए था
मेरा हाल पूछते हो ..बेगानों की तरह
तुम्हें तो सब मालूम होना चाहिए था
बड़ी उम्र तजुर्बा बड़ा है... तो साहब
सिर्फ मेरे नहीं ...बड़ों के काम आना चाहिए था
अनकही कहानियां ..इश्क में नाकामियां..
दफन किसों की ...कब्र पर
दिया जलाना चाहिए था
मेरे दिए फूलों को ...मसल भी सकते थे ..
धागा पिरो इन में ..
. न मसला बनाना चाहिए था
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Goodmorning, emotional shayari
जो छुपा ले तेरी खूबसूरती वो
नकाब कहाँ है
इस गुलशन में तेरे जैसा
गुलाब कहाँ है
ये खूबसूरत आँखें गुलाबी होंठ
और काला तिल
पूरी कायनात में तेरे जैसा आफ़ताब कहाँ है।।
मुझे कुछ कहना है,gajal
मैं आवाज लगाती हूं फिर पीछे पीछे आती हूं
अबकी बार एक काम करो तुम आवाज लगाओ ना
नहीं लेनी है मुझे दवाई सिर का दर्द हटाने को
पास बैठ कर ,बात करो हल्के से सिर को दबाओ ना
होटल में ,कभी ..घर में ,यारों के लिए सजाते हो
मैं और तुम ही बैठे हों कुछ पल ऐसे सजाओ ना
चाय पानी खाना कपड़े इस में उलझ गई हूं कहीं
इलायची वाली सुबह की चाय तुम भी कभी पिलाओ ना
कमियां ही कमियां है मुझ में तुमसे अक्सर सुना मैंने
फिर भी साथ चले हो मेरे!! सॉलिड रीजन बताओ ?
Good morning
इश्क़ आजाद है पहरे लगा कर देख लो
चाहत छुपती नहीं कभी छुपा कर देख लो
यारियां पुरानी कभी भूलते नहीं
भूला सकते हो तो भूला कर देख लो
चाहत छुपती नहीं कभी छुपा कर देख लो
यारियां पुरानी कभी भूलते नहीं
भूला सकते हो तो भूला कर देख लो
achlasguleria
जरा सरका पर्दा तू हमें दीदार करने दे🌷
प्यार गलती है तो हमको यह बार-बार करने दे🌷
जरा पलकों को थामो माथे की सिलवट से🌷
उन आंखों को इन आंखों से चार करने दे🌷
बरसात ,
पर्वतों से झरनों के गिरने का मौसम है
भाव भावनाओं के निकलने का मौसम है।।
भाव भावनाओं के निकलने का मौसम है।।
चप्पल अच्छे से brand की पहनना
दिल नजर कदम फिसलने का मौसम है।।
दिल नजर कदम फिसलने का मौसम है।।
सफाई अभियान जोरों पर है रब का
बादलों के गरजने बरसने का मौसम है।।
बादलों के गरजने बरसने का मौसम है।।
दिल को मजबूती से थामे रखना
किसी रूपसी का बिजली से डरने का मौसम है।।
किसी रूपसी का बिजली से डरने का मौसम है।।
पल पल में रंग बदल रहा है धौलाधार
बादलों का पहाड़ों पर टहलने का मौसम है ।।
बादलों का पहाड़ों पर टहलने का मौसम है ।।
लगाम कस लेते हैं कवि स्वच्छंद मन की
हाथ में कलम के मचलने का मौसम है ।।
हाथ में कलम के मचलने का मौसम है ।।
उमस जलन कीचड़ समाज का देखकर
मौसम से उसको जोड़कर लिखने का मौसम है।।
अचलाएसगुलेरिया
मौसम से उसको जोड़कर लिखने का मौसम है।।
अचलाएसगुलेरिया
Good morning,
The tragedy of human history is decreasing happiness in the midst of increasing comfort
Swamiji
Good morning,shayari,shayaripub.com
हर उम्र का अपना अपना रूआब होता है
हम उम्र लोगों से कुछ ज्यादा ही लगाव होता है
मां बाप का रुतबा जैसा भी हो
हर बच्चा तो घर में नवाब होता है
जवानी की दहलीज पर सब कुछ हसीन लगता है
यह दौर जिंदगी का लाजवाब होता है
जिसे पढ़ते पढ़ते नहीं थकते ताउम्र
दिलबर का चेहरा वह किताब होता है
लिया दिया यही चुका जाते हैं सभी
उस रब का पक्का हिसाब होता है
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Good night
इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी, चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in
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जग तो देखे महज प्रस्तुतीकरण तुम्हारा ईश्वर सदा ही देखे अंतः करण तुम्हारा धर्म-कर्म सब उसको अर्पित कर दो अपने सहज भाव से पूरे हो...
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वो हमारे दिल से निकलने का रास्ता भी नहीं ढूंढ सके जो कहते थे.. तुम्हारी रग रग से वाकिफ हैं हम.. Shayaripub.in