वक्त सिखा देता है उसूल ज़िन्दगी का......
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
Good morning ,ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
तू खुशियों की कहानी गमों की दास्तान
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
आशिकों को दे गमों के ईनाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
किसी की वतन के ,किसी की सनम के
आ जाती है काम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
हर जबाब से ऊपर तू है लाजवाब
चलती सांसों तक चले तेरा नाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
तू कहां किसी को सदियों तक मिली है
बदलती है नजर तू बदलती है मकान
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
आशा निराशा से बांधे सभी को
हर शय जमाने में तेरी गुलाम
अचलाएस गुलेरिया
तू खुशियों की कहानी गमों की दास्तान
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
आशिकों को दे गमों के ईनाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
किसी की वतन के ,किसी की सनम के
आ जाती है काम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
हर जबाब से ऊपर तू है लाजवाब
चलती सांसों तक चले तेरा नाम
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
तू कहां किसी को सदियों तक मिली है
बदलती है नजर तू बदलती है मकान
ए जिंदगी तुझे फिर भी सलाम
आशा निराशा से बांधे सभी को
हर शय जमाने में तेरी गुलाम
अचलाएस गुलेरिया
sad shayari
ना गिरें इस उम्मीद में कि कोई उठा लेगा,
सोच कर मत डूबें कि कोई बचा लेगा,
ये दुनिया रंगमंच है तमाशबीनों का,
मुसीबत में तो हर कोई यहाँ मज़ा लेगा l
जरूरत पड़े तो हर यार तुझे दगा देगा
सोच कर मत डूबें कि कोई बचा लेगा,
ये दुनिया रंगमंच है तमाशबीनों का,
मुसीबत में तो हर कोई यहाँ मज़ा लेगा l
जरूरत पड़े तो हर यार तुझे दगा देगा
Good night
मेरे सीने में कितनी आरज़ू हैं क़ैद जन्मों से
कहीं से आके मेरी,,रूह को आज़ाद कर दे तू
मेरा अंजाम जो भी हो मगर तेरे ही हाथों हो
मुझे आबाद कर दे या कि फिर बरबाद कर दे तू ।
good morning
चादर से पैर
तभी बाहर आते हैं
जब उसूलों से बड़े
ख्वाब हो जाते हैं
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श्री कृष्ण ने कहा है:
ऊधो, कर्मन की गति न्यारी ..
मृत्यु के साथ रिश्ते समाप्त जाते हैं ...
एक बार देवर्षि नारद अपने शिष्य तुम्बरू के साथ मृत्युलोक का भ्रमण कर रहे थे। गर्मियों के दिन थे। गर्मी की वजह से वह पीपल के पेड़ की छाया में जा बैठे। इतने में एक कसाई वहाँ से लगभग ३० बकरों को लेकर जा रहा था।
उसमें से एक बकरा एक दुकान पर चढ़कर मोठ खाने लपक पड़ा। उस दुकान पर नाम लिखा था - *'शगालचंद सेठ।'*
दुकानदार का बकरे पर ध्यान जाते ही उसने बकरे के कान पकड़कर दो-चार घूँसे मार दिये। बकरा 'मैंऽऽऽ.... मैैंऽऽऽ...' करने लगा और उसके मुँह में से सारे मोठ गिर गये।
फिर कसाई को बकरा पकड़ाते हुए कहाः "जब इस बकरे को तू हलाल करेगा न, तो इसकी मुंडी मुझे देना क्योंकि यह मेरे मोठ खा गया है।" देवर्षि नारद ने ध्यान लगाकर देखा और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे।
तब तुम्बरू पूछाः "गुरुदेव! आप क्यों हँस रहे हैं? उस बकरे को जब घूँसे पड़ रहे थे तब तो आप दुःखी हो रहे थे, किंतु ध्यान करने के बाद आप हँस पड़े। इस हँसी का क्या रहस्य है?"
नारद मुनि ने कहाः
"रहने दे ... यह तो सब मनुष्य के कर्मों का फल है, छोड़ ..."
"नहीं गुरुदेव! कृपा करके मुझे इसका रहस्य बताऐं।"
अच्छा सुनो: "इस दुकान पर जो नाम लिखा है 'शगालचंद सेठ' - वह शगालचंद सेठ स्वयं यह बकरे की योनि में जन्म लेकर आया है और वह दुकानदार शगालचंद सेठ का ही पुत्र है। सेठ मरकर बकरा बना और इस दुकान से अपना पुराना सम्बन्ध समझकर इस पर मोठ खाने आ गया।
उसके पूर्व जन्म के बेटे ने उसको मारकर भगा दिया। मैंने देखा कि ३० बकरों में से कोई दुकान पर नहीं गया, फिर यह क्यों गया कमबख्त? इसलिए ध्यान लगाकर देखा तो पता चला कि इसका पुराना सम्बंध था।
जिस बेटे के लिए शगालचंद सेठ ने इतनी महेनत की थी, इतना कमाया था, वही बेटा मोठ के चार दाने खाने को नहीं देता है और खा भी लिये तो कसाई से मुंडी माँग रहा है अपने ही बाप की!"
नारदजी कहते हैं; इसलिए कर्म की गति और मनुष्य के मोह पर मुझे हँसी आ गई। अपने-अपने कर्मों के फल तो प्रत्येक प्राणी को भोगने ही पड़ते हैं और इस जन्म के रिश्ते-नाते मृत्यु के साथ ही समाप्त हो जाते हैं, कोई काम नहीं आता, काम आता है तो बस *भगवान का नाम :*
*हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।*
*हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥*
अपने पुण्यों व पापों का हिसाब इंसान को खुद ही भोगने पड़ते हैं ...
इसलिए,, बंधुओ... मरने के बाद इस संसार से कोई नाता नहीं रहता केवल अपने कर्म फल ही शेफ रहते हैं।
शतहस्त समाहर सहस्त्रहस्त सं किर
*सैकड़ों हाथों से जमा तो करो लेकिन हज़ारों हाथों से बांटो भी।*
Good morning
आ लिख दूँ कुछ तेरे बारे में,
मुझे पता है कि...
तू रोज़ ढूँढ़ता है खुद को मेरे अल्फाज़ों में!
Aa likh dun kuchh tere bare mein mujhe pta hai
Tu roj Dunstable hai khud ko mere alfazon mein
Good morning
बिन बुलाए जाना मुझे मंजूर नहीं..
वो उनका तौर हैं मेरा दस्तूर नहीं ..
bin vulay jana mujhe manjoor nahin
Ye unka tour hai mera dastoor nahin
Good evening
खून के रिश्तो में ही होती है गर्मी
मौका वेमौका आजमा कर देख लो
जीत जाओगे जमाने को साहब
बस सिर को थोड़ा झुका कर देख लो
इश्क की गहराई समझ जाओगे
किसी फकीर से नजरें मिला कर देख लो
मौका वेमौका आजमा कर देख लो
जीत जाओगे जमाने को साहब
बस सिर को थोड़ा झुका कर देख लो
इश्क की गहराई समझ जाओगे
किसी फकीर से नजरें मिला कर देख लो
Good Night, gajal
मेरी वादा खिलाफियां तू नजरअंदाज करता था .
.तेरी इसी अदा पर..तेरा मोहताज होना चाहिए था
बहुत रोए तेरे कूचे से कूच करने के बाद
पर शायद... बिछड़ते वक़्त रोना होना चाहिए था
मेरी बेवफाई पर ..जो चुप है ..
उसे हक जता अपना ..नाराज होना चाहिए था
मेरा हाल पूछते हो ..बेगानों की तरह
तुम्हें तो सब मालूम होना चाहिए था
बड़ी उम्र तजुर्बा बड़ा है... तो साहब
सिर्फ मेरे नहीं ...बड़ों के काम आना चाहिए था
अनकही कहानियां ..इश्क में नाकामियां..
दफन किसों की ...कब्र पर
दिया जलाना चाहिए था
मेरे दिए फूलों को ...मसल भी सकते थे ..
धागा पिरो इन में ..
. न मसला बनाना चाहिए था
.तेरी इसी अदा पर..तेरा मोहताज होना चाहिए था
बहुत रोए तेरे कूचे से कूच करने के बाद
पर शायद... बिछड़ते वक़्त रोना होना चाहिए था
मेरी बेवफाई पर ..जो चुप है ..
उसे हक जता अपना ..नाराज होना चाहिए था
मेरा हाल पूछते हो ..बेगानों की तरह
तुम्हें तो सब मालूम होना चाहिए था
बड़ी उम्र तजुर्बा बड़ा है... तो साहब
सिर्फ मेरे नहीं ...बड़ों के काम आना चाहिए था
अनकही कहानियां ..इश्क में नाकामियां..
दफन किसों की ...कब्र पर
दिया जलाना चाहिए था
मेरे दिए फूलों को ...मसल भी सकते थे ..
धागा पिरो इन में ..
. न मसला बनाना चाहिए था
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