shayari, Good night

        वक़्त वो भी था घिरा रहता था मैं भी भीड़ से। 
         आपकी इक आरज़ू ने मुझको तन्हा कर दिया।। 

     आपकी क़ातिल अदाओं ने हमारी जान ली। 
       क़त्ल का फ़िर आपने ही हम पे दावा कर दिया।। 

     आप गर नज़रें मिलाते हाल सब पढ़ लेते हम। 
      आपने पलकें झुका कर राज़ गहरा कर दिया।। 

       इश्क़ के बाज़ार में कीमत न थी राज मेरी। 
      आपने बोली लगा कर दाम दुगना कर दिया।।
                   GOOD NIGHT

happy monsoon

मुनीश पटियाल  की कलम से

🌹न चिंता थी कोई न फिक्र जमाने का, 🌹
🌹वो  मज़ा ही अलग था बारिश में नहाने का ,🌹
 🌷दोस्त दुश्मन का पता भी नही होता था 🌹
🌹🌹आज दिल टूटने पर भी ख़ामोश है🌹
 🌹🌹जो खिलौना टूटने पर रोता था🌹
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Good night

हमारे ख्वाब में आना उसे क़ुबूल नहीं  
कहीं मिले तो हमारा सलाम कह देना


इश्क़ में हर नफ़स इबादत है 
मज़हब-ए-इश्क़ आदमियत है

इक मोहब्बत भरी नज़र के सिवा 
और क्या अहल-ए-दिल की क़ीमत है 

हफ़ीज़ बनारसी

हाल दिल उनको सुनाया गया
आखों को ही जुंबा बनाया गया....

good morning



बड़े लोगो से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहां दरिया समुन्दर से मिला दरिया नहीं रहता

मुहब्बत एक खुशबु है हमेशा साथ चलती है
कोई इन्सान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता 

तुम्हारा शहर तो बिलकुल नए अंदाज वाला है
हमारे शहर में भी अब कोई हम सा नहीं रहता
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good night

सब कुछ हासिल नही होता जिन्दगी में यहाँ ...

किसी का काश और किसीका अगर रह ही जाता है ...
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Good morning

मैं नजर ना आऊं और तुम बेचैन हो जाओ.....
दोस्ती  में ऐसा मुकाम चाहिए मुझे.....

have a wonderful time,hindi shayari

थोड़ी सी तू अस्त-व्यस्त है
फिर भी जिंदगी तू जबरदस्त है..!

तुमसे आया ना गया
हमसे भुलाया ना गया
फासला प्यार में दोनों
से मिटाया ना गया

तेरी चाहत अब मेरी आँखों में है…..
तेरी खुशबु मेरी साँसों में है….

मेरे दिल को जो घायल कर जाये……
ऐसी अदा सिर्फ तेरी बातों में ही है…..Dev
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झण्डा,तिरंगा

मेरी छत पर तेरी छत पर मस्ती से लहराता झंडा ।

आजादी की अमर कहानी देखो हमें सुनाता झंडा ।

मानवता हम सबका धर्म है यही हमें सिखलाता झंडा 

तीन रंगों की शक्ति अपनी आसमान को दिखाता झंडा।
 
भक्त सिंह जैसे शेरों के शौर्य गीत दोहराता झंडा।।
                                                    अचलाएसगुलेरिया
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एक कहानी,पिता की प्रार्थना

दूरियों में ही परखे जाते हैं रिश्ते,
आंखों के सामने तो सभी वफादार होते है।
                पिता की प्रार्थना




एक बार पिता और पुत्र जलमार्ग से यात्रा करते समय रास्ता भटक कर एक टापू पर पहुंच गये। उनकी नौका उन्हें ऐसी जगह ले आई थी जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई। 
          
परिस्थितियों से चिंतित होकर पिता ने पुत्र से कहा- "लगता है, हम दोनों का अंतिम समय निकट आ गया है। यहां तो दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है तो क्यों न हम ईश्वर से प्रार्थना करें।" 
          
उन्होंने दोनों टापू आपस में बाँट लिए। एक पर पिता और एक पर पुत्र और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।

पुत्र ने ईश्वर से कहा- "हे भगवन! इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।" ईश्वर ने उसकी प्रार्थना अविलंब सुनी। तत्काल वहां पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। यह देखकर उसके मुख से बरबस ही निकल गया- "ये तो चमत्कार हो गया।" 
          
अपनी पहली प्रार्थना पूर्ण होते देखकर उसने पुनः प्रार्थना की-" एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।" तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी। अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे लूँ ? 

उसने ऐसा ही किया और उसने प्रार्थना की-" एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।"

तत्काल वहां नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा। तभी एक आकाशवाणी ने उसे चोंका दिया- "बेटा! तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?"

आकाशवाणी सुनकर पुत्र ने कहा- "उनको छोड़ो! प्रार्थना तो उन्होंने भी की होगी लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी।  शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ?'

पूत्र की बात का आशय समझ कर पुनः आकाशवाणी में कहा गया- "क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?क्या तुम यह नहीं जानना चाहोगे कि उनकी कौन सी प्रार्थना स्वीकार हुई और कौन सी अस्वीकार?"
          
पुत्र बोला-"हां, मैं अवश्य जानना चाहूंगा।"
          
आकाशवाणी में कहा गया-" तो सुनो!तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की- हे भगवन! मेरा बेटा आपसे जो माँगे, उसे दे देना और इस प्रकार आज तुम्हें जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।"
          
स्वार्थ की राह पर निकल कर हम अपने सगे-संबंधियों और शुभचिंतकों से दूर हो जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं। और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर पछताना पड़ता है।

Good evening


आंखों की वीरानी में है सूखी कुम्हलाई शाम 
रात के गहरे आँचल में, हर रोज यूँ ही अकुलाई शाम

सन्नाटे की चादर ओढ़े कंकर पत्थर चुनती है
थके सहमते सूनेपन में आज मिली मुरझाई शाम

संत्रासों की मूक चुभन सी बिखरी डाली-डाली पर 
किस्सा लेकर सहमा सा देखो घर-घर आई शाम

दिन की थी उम्मीद हमें पर सूरज भी अब ढलता था 
धूल भरी आँधी और संग में दहशत भी ले आई शाम 

मंजिल की इन राहों पर था सब्र हमेशा सपनों का 
पत्थर के इस शहर में हमने सूनी सी फिर पाई शाम 

आज कहां कलरव जीवन का, पैबंद मिले हैं खुशियों के 
अनजानी सी रात लिए, आँखों में पथराई शाम 

मिला हाशिए पर ही जीवन और, सफे़ पर मौत मिली
एक अजब सा सन्नाटा, लिए यहाँ सँवलाई शाम 

थके सहमें पंछी लौटे, नीड़ों में भी चुप्पी है 
साया है कुछ पहचाना सा, हैे किसकी परछाई शाम.     .........                        shayaripub.com 


raj ki shayari,

कभी आओ तुम मेरे घर ऐसा इत्तिफ़ाक़ हो  ,
गर्मी का मौसम हो और पूरे शहर में बरसात हो

क्या हुआ जो चिरागे ज़िन्दगी बुझ गयी
तेरी चाहत की तपिश चिता  मे अब भी बाकि है
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Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in