good morning

साथ तुम्हारे जब होती हूँ गीत, ग़ज़ल हो जाती हूँ
जब तुम सुंदर कह देते हो ताजमहल हो जाती हूँ
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फूल के जैसा है तन मेरा तुम बिल्कुल चंदन से हो
कुंज गलिन सी मैं हूँ पावन तुम भी तो मधुबन से हो
शिव बनकर जब छू लेते हो गंगाजल हो जाती हूँ
जब तुम सुंदर कह देते हो ताजमहल हो जाती हूँ

हृदयपत्र पर ढ़ाई आखर लिखकर पूर्ण विराम किया
सौंप के अपना जीवन तुझको सबकुछ तेरे नाम किया
मानसरोवर सी आँखों में नीलकमल हो जाती हूँ
जब तुम सुंदर कह देते हो ताजमहल हो जाती हूँ

यह केवल अनुबंध नहीं है जन्मों का सम्बंध है ये
साथ रहेंगे सात जनम तक पावनतम सौगंध है ये
प्रिय अंक में पाकर खुद को मैं प्रांजल हो जाती हूँ
जब तुम सुंदर कह देते हो ताजमहल हो जाती हूँ
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एक कहानी जो आपने कभी नहीं...

                           सलाह

बाबू मोशाय एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।

वह और उनकी पत्नी कोलकाता के एक छोटे से फ्लैट में रहते हैं।

उन्होंने दसहरा छुट्टिओं में शिमला मनाली जाने की योजना बनाई।

बाहर जाने से पहले जयंत बाबू ने सोचा कि अगर उनकी गैरमौजूदगी में कोई चोर घुस गया तो वो घर की सारी अलमारी और पेटी तोड़ कर
क्षतिग्रस्त कर देंगे क्योंकि कोई नकद नहीं मिलेगा।

इसलिए उन्होने घर को बर्बाद होने से बचाने के लिए 1000 रुपये टेबल पर रख दिए।

एक संवाद के साथ जिसमें त्लिखा थि

हे अजनबी मुझे बहुत अफ़सोस है।

मेरे घर में प्रवेश करने के लिए आपकी कड़ी मेहनत के लिए मेरी हार्दिक बधाई।

लेकिन हम शुरू से मध्यम वर्गीय परिवार हैं।

हमारा परिवार पेंशन के थोड़े से पैसे से चलता है।

हमारे पास कोई अतिरिक्त नकदी नहीं है।

मुझे सच में बहुत शर्म आ रही है कि आपकी मेहनत और आपका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।

इसलिए मैंने आपकी पैरों की धूल देने के सम्मान में इस छोटे से पैसे को मेज पर छोड़ दिया।

कृपया मुझे स्वीकार करें।

और मैं आपको आपके बिजनेस को बढ़ाने के कुछ तरीके बता रहा हूं।

आप कोशिश कर सकते हैं।

सफलता मिलेगी।

मेरे फ्लैट के सामने आठवीं मंजिल पर एक बहुत प्रभावशाली मंत्री रहता है।

नामी प्रॉपर्टी डीलर सातवें में रहता है।

सहकारी बैंक के अध्यक्ष छै तला में रहते हैं।

पांचवे मंजिल पर प्रमुख उद्योगपति।

चौथी मंजिल पर नामी बिजनेसमैन हैं।

व तीन मंजिल पर एक राजनीतिक नेता हैं।

उनका घर गहनों और नकदी से भरा है।

मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि आपकी व्यावसायिक सफलता उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएगी और उनमें से कोई भी पुलिस को रिपोर्ट नहीं करेगा।

यात्रा के बाद जयंतबाबू और उनकी पत्नी वापस लौटे।

एक लाख रुपये का गुच्छा और टेबल पर रखा एक पत्र देखकर वह हैरान रह गये।

पत्र पर लिखा है
आपके  निर्देश और शिक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर।

मुझे इस बात का अफ़सोस है कि मैं पहले आपके करीब नहीं आ पाया।

आपके निर्देशानुसार मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

मैंने इस छोटी सी राशि को धन्यवाद के रूप में छोड़ दिया।

भविष्य में और अधिक आशीर्वाद की कामना करता हूँ।

*भवदीय - चोर*

good night

एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है,
 कोई जी लेता है जिंदगी, किसी की कट जाती है।
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good morning

मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाये हमने,
अफसोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं,

मत पूछों क्या गुजरती है दिल पर,
जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं है।                 shayaripub.in


good morning

नज़र तलाशती हैं जिसको,
वो प्यारा सा ख्वाब हो तुम।
मिलती हैं दुनिया सारी,
न मिलकर भी लाजवाब हो तुम।
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dev,love shayari

कौन कहता है कि कुछ नहीं 
तेरे मेरे दरमियाँ...

वो एहसासों का हुजूम,
वो जज़्बातों का सैलाब,,
देव की कलम से

वो अनकही बातें,
वो अनछुए अरमाँ,,

बिखरी सी ख़्वाहिशें,
फैले से ख़्वाब,,

वो सुकूँ के बिछे गलीचे,
वो ख़यालातों के बगीचे,,

वो महकती हुई साँसें,
उम्मीदों की मुस्कान,,

कौन कहता है कि कुछ नहीं 
तेरे मेरे दरमियाँ...

good morning

देव की कलम से
सुना है !तुम्हारी एक निगाह से
कत्ल होते हैं लोग🌹🌹
🌷🌷एक नज़र हमको भी देख लो
ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती *तुम बिन* 🙏🌹

Goodmorning

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          एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने गया। नाई बहुत बडा़ नास्तिक था वह किसी ईश्वरीय अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता था, बाल काटते समय उन दोनो के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग बातें करते-करते “ईश्वर” के विषय पर बातें करने लगे। तभी नाई ने कहा- "मैं ईश्वर के अस्तित्व को कतई नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो।" व्यक्ति ने आश्चर्य से पूछा- “तुम ऐसा क्यों कह रहे हो। अरे ईश्वर तो जग के कण कण में है।
 नाई ने कहा- “बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे तो तुम समझ जाओगे कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है। अगर ईश्वर होते, तो क्या इतने सारे लोग भूखे मरते ? क्या इतने सारे लोग बीमार होते ? क्या दुनिया में इतनी हिंसा होती ? ईतने पाप होते क्या कष्ट या पीड़ा होती ? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति दे।" व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा।
          नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया। वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, और ऐक ढाबे में चाय पिने लगा कुछ देर बाद  उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे। सड़क पर खड़े हो कर वह बेतरबीब से सिगरेट पी रहा था  वह व्यक्ति उठकर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा- “क्या तुम्हें पता है ? नाइयों का भी अस्तित्व नहीं होता।” नाई ने उसे घूरते हुवे कहा- कया मतलब आप कहना कया चाहते है “
मैं कहना चाहता हूं कि नाई इत्यादि कुछ नहीं होता है न ही नाई कि ज़रूरत है।
 तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो ? क्या तुम्हें मैं दिखाई नहीं दे रहा ? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ। और मैंने अभी-अभी तुम्हारे बाल काटे हैं।” तूम पगला गये लगते हो  व्यक्ति ने कहा- “नहीं ! नाई नहीं होते हैं। अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता ?" व्यक्ति ने बाहर खडे़ उस आदमी कि तरफ इशारा करते हुए कहा नाई ने कहा- “अगर वह व्यक्ति किसी नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा ?" व्यक्ति ने कहा- “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, यही बात है। ईश्वर भी होते हैं। लेकिन कुछ लोग ईश्वर पर विश्वास ही नहीं करते तो ईश्वर उनकी मदद कैसे करेंगे ?"
          विश्वास ही सत्य है। अगर ईश्वर पर विश्वास करते हैं तो हमें हर पल उनकी अनुभूति होती है और अगर हम विश्वास नहीं करते तो हमारे लिए उनका कोई अस्तित्व 

     

Good night

अचला गुलेरिया की कविता जो गहन सोच की उपज है 
              एक दिन 
मेरे अंदर कुछ टूटता है बिखर जाता है हर दिन
मैं अनसुना करती हूं उस आवाज को हर दिन

वह टूटन असहज करती है मुझे मगर उसको लादे पीठ पर थक  जाती हूं रुक जाती हूं  फिर आगे की तरफ चल देती हूं हर दिन

आंसू बरबस आते हैं अपने हालात पर उन्हें हाथ में पकड़ कर मसलती हूं कुछ सोचती हूं फिर स्याही बना उड़ेल  देती कागज पर हर दिन

बदल रहे दिन लोग शहर के शहर यह कौन बदल रहा ..और क्यूँ? बदलाव अच्छा भी हो तो  खा जाता है उसको  जो पुराना था पर अपना था यह मैं तन्हाई  में  सोचती हूं हर दिन

चेहरे पर लकीरें अनुभव की गहरी खाइयों की तरह घसीट रही हैं उन विचारों के भंवर में जहां डरते हैं अपनों से बिछड़ जाने से हर दिन

कोई पहले कोई बाद में जाने लगे हैं घर से चुपचाप उठकर किसी नए सितारों के शहर में बुरा लगता है बहुत बुरा लगता है फिर सोचती हूं मैं भी तो जाऊंगी ऐसे ही चुपचाप उठ कर एक दिन
      ।।।।।।।।।।।अचला एस गुलेरिया।।।।।।।।।।।।।

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good night

तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।

गुजरे वक्त की हसीन यादों में खो जाने दो
जब तक अंधेरा है
दिल के शहर में
मुझे बस सो जाने दो
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in