attitude shayari

नजर नजर से मिलेगी तो सिर झुका लेगा,
 वह बेवफा है मेरा इम्तिहान क्या लेगा,

 उसे चिराग जलाने को मत कह देना, 
 वह नासमझ है अपना दामन जला लेगा।
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                           हिन्दी शायरी दिल से

हरे कृष्ण hare krishna

जो हरि नाम मे डूबकी लगा लेता है वो
जन्मो जनमांतर के पापो से मुक्ति पा लेता है
एक यही वो नाम है जो हमे हर पाप....
 की सजा से बचा लेता है
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                          *माँ का तोहफ़ा*

          .    *एक मर्मस्पर्शी कहानी, अवश्य पढ़ें।*
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एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *माँ* पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए?

शालिनी बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है?

यह बात नहीं है शालू...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो.. 

माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।" 

सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए.....

सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।......  
           
सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"

अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।"

अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।

देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है। 

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी। 

पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था।

शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली.... 

हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे..... 

*पर्ची में लिखा था....*       

"बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ..... 

पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी.....

*ऐसी ही होती हैं माँ.....* 

दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी  तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।

*कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए और.....*

inspirational thoughts # quotes

मत बहा आंसूओ में जिंदगी को;
एक नए जीवन का आगाज़ कऱ;
दिखानी है अगर दुश्मनी की हद तो;
ज़िक्र भी मत कर, नज़र अंदाज़ कर।
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          अक्सर हम 
           साथ साथ टहलते है 
            तुम ज़हन में मेरे 
                मैं छत पर 
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emotional shayari ,shayari

मैं शौक दबा कर रखता हूँ बीमार थोड़ी हूँ ,
 तुम चाहती हो मैं रोज मिलूं अखबार थोड़ी हूँ 


दुनिया में कम लोग ही ऐसे होते हैं

जो लगते हैं जैसे..

वैसे होते हैं!!!

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ज़िंदगी को हौसला देने के ख़ातिर
ख़्वाहिशों को रेज़ा रेज़ा चुन रहा हूँ 
      
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love# shayari # emotional shayari

तुझे शब्दों में लिखना आसान नही,

तू मेरा हिस्सा है कोई दास्तान नहीं.
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sad shayari # ज़ख्मी दिल

मुझे मालूम नहीं उससे
अलग हो जाने की वजह...!
न जाने हवाएं तेज़ थीं या मेरा
उस शाख से रिश्ता कमज़ोर
था...!!
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जय सियाराम

तबहिं लखन रघुबर रुख जानी।
पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी॥
सुनत नारि नर भए दुखारी। 
पुलकित गात बिलोचन बारी॥ 

अर्थ:-उसी समय श्री रामचन्द्रजी का रुख जानकर लक्ष्मणजी ने कोमल वाणी से लोगों से रास्ता पूछा। यह सुनते ही स्त्री-पुरुष दुःखी हो गए। उनके शरीर पुलकित हो गए और नेत्रों में (वियोग की सम्भावना से प्रेम का) जल भर आया॥ 

श्री रामचरित मानस 
अयोध्याकांड (११७) 
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हर हर महादेव

*इत्र, मित्र, चित्र और चरित्र किसी*
*की पहचान के मोहताज़ नहीं।*
  *ये चारों अपना परिचय स्वयं देते हैं...*
  *आपका दिन मंगलमय हो ..🙏🏻
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hare krishna हरे कृष्ण

*क्या है कृष्ण होने के मायने ?*
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पहली गाली पर 'सर काटने' की शक्ति होने बाद भी; यदि 99 और गाली सुनने का 'सामर्थ्य' है, तो वो कृष्ण है।
सुदर्शन' जैसा शस्त्र होने के बाद भी; यदि हाथ में हमेशा 'मुरली' है, तो वो कृष्ण है।
'द्वारिका' का वैभव होने के बाद भी; यदि 'सुदामा" मित्र है, तो वो कृष्ण है।
'मृत्यु' के फन पर मौजूद होने पर भी; यदि 'नृत्य' है तो, वो कृष्ण है।
सर्वसामर्थ्य' होने पर भी; यदि 'सारथी' है, तो वो कृष्ण है।
 *जय श्रीकृष्ण* 
🌞🌞

सूली ऊपर सेज हमारी

मीरा कहती है सूली ऊपर सेज हमारी ,
सोवण किस विधि होइ ।
'इधर सूली पर हम बैठे है तुम कहते हो सो जाओ ।
 सुली पर सेज लगी हो तो कोई कैसे सोये !
 कल सुबह तुम्हारी मौत आने वाली हो , 
कल सुबह तुम्हे फ़ासी लगने वाली हो , 
तुम आज रात सोओगे ? 
कोई उपाय नही है सोने का।
 यह संसार तो सूली है ,
इसमें सोना कैसे हो सकता है !
इस बात को समझ लो 
 यह संसार सूली है,
 क्योकि इस संसार में सिवाय मौत के और कुछ भी नही घटता ।
जन्म के बाद बस एक ही बात निश्चित है :मौत ।
 जन्म के बाद मृत्यु के अतिरिक्त यहा कुछ भी नही घटता ।
 बाकी तो सब व्यर्थ की बातचीत है ।
जिसे तुम घटना कहते हो 
कि राष्ट्रपति हो गये , 
कि खूब धन कमा लिया , 
कि खूब प्रसिद्धि हो गयी , 
इन सब का कोई भी मूल्य नही है ।
तुम मरे कि सब भूल जाएगा , सब पद खो जाएगा ,
 चार दिन के बाद तुम्हे कोई याद करने वाला भी न बचेगा ।कुछ वर्षों बाद , 
तुम हुए भी थे या नही
हुए थे , 
इसमें भी भेद करना मुश्किल हो जाएगा ।
जरा ख्याल करो ! 
तुमसे पहले अरबो-अरबो
लोग इस पृथ्वी पर हो चुके है । तुम्हारे जैसे ही सपने देखने वाले लोग , 
तुम्हारे जैसे ही धन इकट्ठा करने वाले लोग ,
तुम्हारे जैसे ही पद-लोलुप,
धन -लोलुप !
 वो सब अब कहा है ? 
उनके नाम भी तो पता नही । वे कहा खो गये ? 
हो सकता है , 
जिस धूल में चलकर आये हो उस धूल में पड़े हो ।
तुम जिस जगह पर बैठे हो , वही उनकी लाश गड़ी हो , वही उनकी हड्डिया गल गयी हो ।
कभी वो भी अकड़कर चलते थे जैसे तुम अकड़कर चलते हो ।
कभी किसी का जरा सा धक्का लग गया था तो नाराज हो गए थे , 
तलवारे खिंच गयी थी । 
आज धूल में पड़े है और कोई भी उन्हें पैरो से रौंदे चला जा रहा है ।
न नाराज हो सकते है , न तलवारे खिंच सकते है ।विश्वासी झूठी श्रद्धा में जीता है;:
इसलिए कही पहुच नही पाता। श्रद्धालु यात्रा पर चल पड़ता है।
श्रद्धा की यात्रा ही एक दिन ज्ञान की मंजिल पर पहुचा देती है ।
ज्ञानी पहुच गया , 
श्रद्धालु चल पड़ा ।
विश्वासी सिर्फ सोच रहा है कि चलेगे ,
कि चल रहे है , 
कि पहुच रहे है ।
विश्वासी निद्रा में पड़ा है ।
या तो जौहर बनो या जौहरी बनो ! 
तो ही तुम समझ पाओगे कि मीरा क्या कह रही है।

ओशो




emotional shayari # बेटी है अनमोल

बीस बरस तक बाप उधड़ता है थोड़ा थोड़ा  
तब सिलता है इक बेटी की शादी का जोड़.
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emotional shayari

लय में डूबी हुई मस्ती भरी आवाज़ के साथ 

छेड़ दे कोई गजल इक नए अंदाज़ के साथ...
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...