Good morning

प्रत्येक दिन ईश्वर का दिया हुआ आशीर्वाद है ।।

Prtyek din ishwar ka diya hua ashirwad hai
Every new day is a blessing  given by God
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Good morning

चिलखती धूप में झुलसे तो हम ने ये जाना

घने दरखतों की नरम छांव कैसी होती है
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hare krishna

नफ़रत कमाना भी,
इस दुनिया में आसान नहीं है....

लोगो की आँखों में खटकने के लिए भी,
कुछ खूबियाँ तो होनी चाहिए ...!

कामयाबी"" के सफर
में "धूप" का बड़ा महत्व
होता हैं!

क्योंकि ""छांव"" मिलते ही
"कदम" रुकने लगते है।
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Good night

दरमियान अब कुछ भी ऐसा नहीं रहा,

जिससे लगे कि वो मेरा है।”
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good morning

वहने नही देता आंसू औलाद के सामने,
पानी का सबसे मजबूत बांध पिता होता है ।।


जय श्री कृष्ण 
शब्दों की ताकत को
कम मत आंकिये...
क्योंकि 
छोटा सा *"हाँ"* और
 छोटा सा  " *ना* " 
पूरी जिंदगी बदल देता है।
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Good night

जो बरसों बिना सोये ही गुज़र गयीं,

वो रातें तुम पर क़र्ज़ हैं।
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Good morning

ख्वाब तो वो है जिसका
      हकीकत में भी दीदार हो

कोई मिले तो इस कदर मिले.

जिसे मुझ से ही नही,
      मेरी रूह से भी प्यार हो
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हर कोई अधूरा है...

     किसी अपने के बिना... 
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nari purush hone lgi

🌹आर्यव्रत के आर्यों की अस्मिता खोने लगी
पुरुष प्रधान समाज में नारी पुरुष होने लगी🌹

धर्म का ध्वज थामना क्या जब घर में ही संस्कार नहीं
बराबरी की होड़ में किसी को किसी से प्यार नहीं
वात्सल्य समर्पण पवित्रता बेरंग हो रोने लगी
पुरुष प्रधान समाज में नारी पुरुष होने लगी🌹

बिंदिया चूड़ी बंधन तो शॉट्स में आजादी है
पढ़ी-लिखी औलाद कई नशों की आदी है
मां की लाडली लाडो कुल की लुटिया डुबोने लगी
आर्यव्रत के आर्यों की अस्मिता खोने लगी🌹

मां बाप से बच्चे देखो कितना आगे निकल गए
आंख कि शर्म को बिना पानी निगल गए
कुल परंपरा दामन में अपना ,मुंह छुपा रोने लगी
पुरुष प्रधान समाज में नारी पुरुष होने लगी🌹
                             लेखिका   अचलाएसगुलेरिया...  ............Shayaripub.in

सुप्रभात, good morning

खो" देते हैं,रिश्तों को
फिर...
"खोजा" करते हैं,
यही खेल हम!
 जिन्दगी भर "खेला" करते हैं.....
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बच्चे के जन्मते ही 
एक भाषा भी जन्मती है
उसके भीतर
उसकी माँ के भीतर 
वो भाषा जो बच्चा बोल नहीं सकता
वो भाषा जो माँ समझ जाती है।
वो भाषा जिसमें वो रोता है
वो भाषा जिसमें वो हंसता है
वो भाषा जिसमें माँ बसती है
वो भाषा जिससे माँ की हस्ती है।
फिर एक दिन बच्चा 
वो भाषा तब भूल जाता है
जब माँ बोल नहीं पाती.
🌹GOOD DAY🌹
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Good morning

उसकी आँखे बयां करती होंगी मेरी बेपन्हा मोहब्बत….
शायद …..
इसीलिए …
नजर झुक जाती है उसकी मेरी गली से गुज़रते हुए

उसकी आँखे बयां करती होंगी मेरी बेपन्हा मोहब्बत….
शायद …..
इसीलिए …
नजर झुक जाती है उसकी मेरी गली से गुज़रते हुए

 आओ इक मयकदा बनाए हम:
शेख वाइज़ को भी पिलाएं हम।

ज़िन्दगी खुद में इक इबादत है;
राज़ की बात ये बताएं हम।

घर के बाहर बहुत अंधेरा है;
आओं भीतर शमा जलाएं हम।

आशिकी बेखुदी नहीं यारो;
प्यार को बन्दगी बनाएं हम।

इश्क में रोने का है क्या मतलब?
आओ हंसकर पिएं - पिलाएं हम।

मेरे मुर्शिद ने इल्म ऐसा दिया
आदमी से खुदा हो जाएं हम।।
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विभीषण

*पात्र अत्यंत विलक्षण हो जाना तटस्थ पुरुष दर्पण हो जाना*
            *आसान नहीं विभीषण हो जाना ।*

*महलों में योगी वह रहता 
सुख-दुख सब सम भाव से सहता*
      *हरिदर्शन करते-करते स्वयं एक दर्शन हो जाना ।।*

*सत्य पक्ष में ध्वजा धारी है 
बड़े भाई का आज्ञाकारी है 
कर्म धर्म से नीच भाई के आगे सदा नतमस्तक रहना ।।

पुलस्त्य कुल वंशी ज्ञान रूप सब ।
बने निशाचर अधम कुरूप अब
अतिदुश्कर  है  सबका .....पुनः सुमार्ग पर आना


रावण जब सीता हर लाया
 अग्रज को बहुत समझाया
कौन बचाए युद्ध से उसको जिसने निज विनाश हो ठाना

हनुमानको वैदेही का पता बता।
घर का भेदी होने का कलंक उठाया
परमार्थ कारण ध्वल चरित्र कलंकित कर लेना

वीर पुरुष ने महिपति को पंथ दिखाया
नीति विरुद्ध ना मारें दूत यह मंत्र समझाया
क्रोधी, मोही, दंभी  सभा में बिना डरे, अपना मत देना

  सन्मार्ग पर लाने का प्रयत्न किया था
युद्ध रोकने का हर संभव यत्न किया था
छोटे प्रयास का बड़े आरोप में दफन हो जाना

स्वाभिमान को तोड़ दिया अपने अपनों ने
ऐसा दुर्व्यवहार न सोचा था सपनों में
जगत से ठोकर खाकर प्रभु शरण में जाना

अगर ना होता विभीषण तो क्या लंका होती
पराधीन हो सारी जनता हर पल रोती
शत्रु के हाथों अपना राजतिलक करवाना

अश्रु धार से राम की मानस पूजा करते
अपने आपको हरि चरणों में अर्पित करके
श्रुति निंदा से मुक्त हो राम राम गुण गाना

असत्य हारा जब रावण हारा लंका ना हारी
  पा हरिभक्त नरेश सभी हर्षे नर नारी
पुरवासियों को राम नाम का मरम सिखाना
                              अचला शर्मा गुलेरिया
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in