प्रेम अपरिभाषित है#love#Goodmorning#

                  प्रेम अपरिभाषित 
परमात्मा
का प्रेम क्या है?
यह एक विराट सागर है।
जिसके अनुभव को
शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
जो इस प्रेम को पा लेता है,
उसके लिए कोई दुख नहीं बचता,
न कोई बुढ़ापा और न कोई मृत्यु।
परमात्मा का प्रेम 
आपको बोध कराता है कि आप
शरीर नहीं, शुद्ध चेतना हैं।
आपका कोई जन्म या मृत्यु नहीं है। 
और इस शुद्ध चेतना में जीना ही
परम सुख की स्थिति है
आनन्द की स्थिति है।
जीवन की संगति में जीना है।
                                       ओशो

     प्रेम अपरिभाषित 
पावन नेह सदा ध्रुवनंदा सा बहेगा

जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

अग्रज वंदना "र"कर रहा है।
देखो बड़ों को नमन कर रहा है।।
छोटों को अंक में "प"भर रहा है
परस्पर स्नेह  यह शाश्वत रहेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा
कर्म पथ की ऊंची डगर पर चला है ।
"ए "देखो गौरव से कैसे खड़ा है ।।
अकेले खड़े रहना अपनों की खातिर
हम सब को यह सिखाता रहेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

ममता  मां मरम जिसमें छुपे हैं ।
मान ,नियम ,जिसके आगे झुके हैं।।
संयोग वियोग के भावजगत में
प्रणय को" म"ही सुभाषित करेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

प्रकृति की यह प्रिय सन्नतति है
सम्पूर्ण विश्व इसकी सहज उत्पत्ति है
मानवीय संस्कार सबको सिखा कर
भावों के नूतन रंग भरेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा ।।
                                       अचला एस गुलेरिया
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emotional shayari

मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं।
एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे।।
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जहाँ तक तुम ने छुआ वही तक जिया हूँ,
बाकी सिर्फ खयाल हूँ, ख्वाब हूँ,  धुआँ हूँ..                            shayaripub.com 
सुनसुनो ना 
जैसे
बेमौसम बारिश की
 कुछ बूंदें
शाख के पत्तें गीले
कर देती है,
तुम भी
अनायास ऐसे ही मेरी
जिंदगी में आकर
मुझे 
प्रेम से भिगो दो....!!!
          Shayaripub.com 

सुनो ना!
जैसे
बेमौसम बारिश की
 कुछ बूंदें
शाख के पत्तें गीले
कर देती है,
तुम भी
अनायास ऐसे ही मेरी
जिंदगी में आकर
मुझे 
प्रेम से भिगो दो....!!!
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हरे कृष्ण # hare krishna

*अनुभव कहता है कि थोड़ा सोच समझ कर बोलिये अपनों से भी...*

*क्योंकि वे इतनी जल्दी बातें नहीं मानते' जितना जल्दी बुरा मान जाते हैं...*
                 
           🌹🌹🌹 *जय श्री कृष्ण*🌹🌹🌹
               
               *एक वकील का सुनाया हुआ 
                   एक किस्सा* - सत्य घटना


"मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, 
एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा।
उसके हाथ में कागज़ो का बंडल, 
धूप से काला हुआ चेहरा, 
बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े,उसके पंजों में मिट्टी
 लगी थी।"

उसने कहा - "उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है, बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... 
खर्च क्या लगेगा ... "

मैंने उन्हें बैठने का कहा - 

"रघु, पानी दे इधर" मैंने आवाज़ लगाई!

वो कुर्सी पर बैठे!

उनके सारे कागजात मैंने देखे, 
उनसे सारी जानकारी ली, 
आधा पौना घंटा गुजर गया।

"मै इन कागज़ो को देख लेता हूँ ,
फिर आपके केस पर विचार करेंगे। 
आप ऐसा कीजिए, 
अगले शनिवार को मिलिए मुझसे।" 

चार दिन बाद वो फिर से आए- !
वैसे ही कपड़े
बहुत अशांत लग रहे थे

अपने छोटे भाई पर गुस्सा बहुत थे!
 
मैंने उन्हें बैठने का कहा,

वो बैठे!

ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी।

मैंने बात की शुरुआत की ! -
"बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए।
और आपके परिवार के बारे में और आपकी निजी जिंदगी के बारे में भी मैंने 
बहुत जानकारी हासिल की।
मेरी जानकारी के अनुसार:
आप दो भाई है, एक बहन है,
आपके माँ-बाप बचपन में ही गुजर गए।
बाबा आप नौवीं पास है 
और आपका छोटा भाई इंजिनियर है।
अपने छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपने स्कूल छोड़ा, लोगो के खेतों में दिहाड़ी पर काम किया,
 कभी अंग भर कपड़ा और पेट भर खाना आपको नहीं मिला फिर भी भाई के पढ़ाई के लिए पैसों की कमी आपने नहीं होने दी।

एक बार खेलते खेलते भाई पर किसी बैल ने सींग घुसा दिया तब भाई लहूलुहान हो गया।
फिर आपने उसे कंधे पर उठा कर 5 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल लेे गए। 
सही देखा जाए तो आपकी उम्र भी नहीं थी 
ये करने की, 
पर भाई में जान बसी थी आपकी।
माँ बाप के बाद मै ही इन का माँ-बाप… 
ये भावना थी आपके मन में।

फिर आपका भाई इंजीनियरिंग में 
अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले पाया 
और आपका दिल खुशी से भरा हुआ था।
फिर आपने जी तोड़ मेहनत की।
 80,000 की सालाना फीस भरने के लिए आपने रात दिन एक कर दिया यानि बीवी के गहने गिरवी रख के, कभी साहूकार कार से पैसा ले कर आपने उसकी हर जरूरत पूरी की।
फिर अचानक उसे किडनी की तकलीफ शुरू हो गई, डॉक्टर ने किडनी बदलने का कहा 
और
तुम ने अगले मिनट में अपनी किडनी उसे दे दी यह कह कर कि कल तुझे अफसर बनना है,
नौकरी करनी है, 
कहाँ कहाँ घूमेगा बीमार शरीर लेे के। 
मुझे गाँव में ही रहना है, 
ये कह कर किडनी दे दी उसे।

फिर भाई कालेज हॉस्टल पर रहने लगा।त्यौहार पर्व पर घर में जो पकवान मिठाई इत्यादि बनें भाई को देने जाओ, 
कोई तीज त्योहार हो, भाई के कपड़े बनाओ।
घर से हॉस्टल 25 किलोमीटर तुम उसे  भोजन का डिब्बा देने साइकिल पर गए।
हाथ का निवाला पहले भाई को खिलाया तुमने।
फिर आपकी मेहनत रंग लाई ओर भाई इंजीनियर बन गया, 
तुमने प्रशांता वश गाँव के लोगों को खाना खिलाया।
फिर उसने उसी के कॉलेज की लड़की जो दिखने में एकदम सुंदर थी से शादी कर ली ,
तुम सिर्फ समय पर ही वहाँ गए।
भाई को नौकरी लगी, 
3 साल पहले उसकी शादी हुई, 
अब तुम्हारा बोझ हल्का होने वाला था।
पर किसी की नज़र लग गई 
आपके इस प्यार को।
शादी के बाद भाई ने आना बंद कर दिया। 
पूछा तो कहता है मैंने बीवी को वचन दिया है।
घर पैसा देता नहीं, 
पूछा तो कहता है कर्ज़ा सिर पे है।
पिछले साल शहर में फ्लैट खरीदा।
पैसे कहाँ से आए पूछा तो कहता है 
कर्ज लिया है।
मैंने विरोध किया तो कहता है भाई, 
तुझे कुछ नहीं मालूम, 
तू निरा गवार ही रह गया।
अब तुम्हारा वही भाई चाहता है 
गाँंव की आधी खेती बेच कर उसे अपना हिस्सा दे दे।
इतना कह के मैं रुका - रघु की लाई चाय की प्याली मैंने मुँह से लगाई -!
"तुम चाहते हो भाई ने जो मांगा 
वो उसे ना दे कर उसके ही फ्लैट पर 
स्टे लगाया जाए - क्यों यही चाहते हो तुम..." 

वो तुरंत बोला, "हां"

मैंने कहा - हम स्टे लेे सकते है, 
भाई के प्रॉपर्टी में हिस्सा भी माँग सकते हैं

                            पर….

1) तुमने उसके लिए जो खून पसीना एक किया है वो नहीं मिलेगा!

2) तुम्हारीे दी हुई किडनी वापस नहीं मिलेगी!

3) तुमने उसके लिए जो ज़िन्दगी खर्च की है 
वो भी वापस नहीं मिलेगी।

मुझे लगता है इन सब चीजों के सामने 
उस फ्लैट की कीमत शून्य है।
 
तुम्हारे भाई की नीयत फिर गई, 
वो अपने रास्ते चला गया ;
अब तुम भी उसी कृतघ्न सड़क पर मत जाओ।

वो भिखारी निकला,

तुम दिलदार थे।

दिलदार ही रहो …..

तुम्हारा हाथ ऊपर था,

ऊपर ही रखो।

कोर्ट कचहरी करने की बजाय 
बच्चों को पढ़ाओ लिखाओ।
पढ़ाई कर के तुम्हारा भाई बिगड़ गया ,
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि 
तुम्हारे बच्चे भी ऐसा करेंगे..."

वो मेरे मुँह को ताकने लगा।

उठ के खड़ा हुआ, सब काग़ज़ात उठाए 
और आँखे पोछते हुए बोला - 
"चलता हूँ, वकील साहब।" 

उसकी रूलाई फुट रही थी और वो 
मुझे  दिख ना जाए ऐसी कोशिश कर रहा था।

इस बात को अरसा गुजर गया!
                    
कल वो अचानक मेरे ऑफिस में आया।
कलमों में सफेदी झाँक रही थी उसके। 
साथ में एक नौजवान था और हाथ में थैली।

मैंने कहा- "बाबा, बैठो"

उसने कहा, "बैठने नहीं आया वकील साहब, मिठाई खिलाने आया हूँ । 
ये मेरा बेटा, बैंक मैनेजर है !
बैंगलोर में रहता है, कल आया है गाँव।
अब तीन मंजिला मकान बना लिया है वहाँ।
थोड़ी थोड़ी कर के 10–12 एकड़ खेती की जमीन खरीद ली अब।"

मै उसके चेहरे से टपकते हुए खुशी को 
महसूस कर रहा था
"वकील साहब, आपने मुझे कहा था-  
कोर्ट कचहरी के चक्कर में मत पड़ो !"
आपने बहुत नेक सलाह दी 
और मुझे उलझन से बचा लिया।
जबकि गाँव में सब लोग मुझे 
भाई के खिलाफ उकसा रहे थे।
मैंने उनकी नहीं, आपकी बात सुन ली 
और मैंने अपने बच्चो को लाइन से लगाया और भाई के पीछे अपनी ज़िंदगी बरबाद नहीं होने दी।
कल भाई और उनकी पत्नी भी घर आए थे।
 पाँव छू छूकर माफी मांगने लगे।
मैंने अपने भाई को गले से लगा लिया।
और मेरी धर्मपत्नी ने उसकी धर्मपत्नी को 
गले से लगा लिया।
हमारे पूरे परिवार ने बहुत दिनों बाद 
एक साथ भोजन किया।
बस फिर क्या था आनंद की लहर 
घर में दौड़ने लगी।

मेरे हाथ का पेडा हाथ में ही रह गया
 
मेरे आंसू टपक ही गए आखिर. .. .

*गुस्से को योग्य दिशा में मोड़ा जाए 
तो पछताने की जरूरत नहीं पड़े कभी*

बहुत ही अच्छा है इस को समझना 
और अमल में लाना चाहिए।
यह एक सच्ची घटना है 
शिक्षाप्रद है और बेमिसाल भी है!

                         *जय गुरुदेव*

emotional shayari

हमको तुमसे प्यार न होता तो अच्छा होता।
दिल को तुझपे ऐतबार न होता तो अच्छा होता।

दिल में तेरी यादों का ज आना जाना तो होता।
 तेरा इंतजार न होता तो  अच्छा होता।। 
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सुनो 
           मुझे बताओ जरा!
*इससे बड़ा कातिल अब कौन है यहाँ,*

*मजबूरियाँ रोज़ ख़्वाहिशों का गला घोंटती हैं....!*
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एक मेरी ही याद से परहेज़ है तुमको

न जाने किस हक़ीम से दवा लेते हो
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attitude shayari

नजर नजर से मिलेगी तो सिर झुका लेगा,
 वह बेवफा है मेरा इम्तिहान क्या लेगा,

 उसे चिराग जलाने को मत कह देना, 
 वह नासमझ है अपना दामन जला लेगा।
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                           हिन्दी शायरी दिल से

हरे कृष्ण hare krishna

जो हरि नाम मे डूबकी लगा लेता है वो
जन्मो जनमांतर के पापो से मुक्ति पा लेता है
एक यही वो नाम है जो हमे हर पाप....
 की सजा से बचा लेता है
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   .               
                          *माँ का तोहफ़ा*

          .    *एक मर्मस्पर्शी कहानी, अवश्य पढ़ें।*
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एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *माँ* पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए?

शालिनी बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है?

यह बात नहीं है शालू...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो.. 

माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।" 

सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए.....

सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।......  
           
सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"

अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।"

अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।

देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है। 

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी। 

पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था।

शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली.... 

हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे..... 

*पर्ची में लिखा था....*       

"बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ..... 

पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी.....

*ऐसी ही होती हैं माँ.....* 

दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी  तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।

*कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए और.....*

inspirational thoughts # quotes

मत बहा आंसूओ में जिंदगी को;
एक नए जीवन का आगाज़ कऱ;
दिखानी है अगर दुश्मनी की हद तो;
ज़िक्र भी मत कर, नज़र अंदाज़ कर।
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          अक्सर हम 
           साथ साथ टहलते है 
            तुम ज़हन में मेरे 
                मैं छत पर 
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emotional shayari ,shayari

मैं शौक दबा कर रखता हूँ बीमार थोड़ी हूँ ,
 तुम चाहती हो मैं रोज मिलूं अखबार थोड़ी हूँ 


दुनिया में कम लोग ही ऐसे होते हैं

जो लगते हैं जैसे..

वैसे होते हैं!!!

.
ज़िंदगी को हौसला देने के ख़ातिर
ख़्वाहिशों को रेज़ा रेज़ा चुन रहा हूँ 
      
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love# shayari # emotional shayari

तुझे शब्दों में लिखना आसान नही,

तू मेरा हिस्सा है कोई दास्तान नहीं.
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sad shayari # ज़ख्मी दिल

मुझे मालूम नहीं उससे
अलग हो जाने की वजह...!
न जाने हवाएं तेज़ थीं या मेरा
उस शाख से रिश्ता कमज़ोर
था...!!
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जय सियाराम

तबहिं लखन रघुबर रुख जानी।
पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी॥
सुनत नारि नर भए दुखारी। 
पुलकित गात बिलोचन बारी॥ 

अर्थ:-उसी समय श्री रामचन्द्रजी का रुख जानकर लक्ष्मणजी ने कोमल वाणी से लोगों से रास्ता पूछा। यह सुनते ही स्त्री-पुरुष दुःखी हो गए। उनके शरीर पुलकित हो गए और नेत्रों में (वियोग की सम्भावना से प्रेम का) जल भर आया॥ 

श्री रामचरित मानस 
अयोध्याकांड (११७) 
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...