sad shayari, emotional shayari

*हमने सोचा था कि बताएंगे सब दुःख दर्द तुमको....*

*पर तुमने तो इतना भी न पूछा कि खामोश क्यों हो*




तेरे ख़्याल में जब 
बे-ख़्याल होता हूँ,,

थोड़ी देर ही सही 
बे-मिसाल होता हूँ...!!!


वो बर्फ़ का शरीफ टुकड़ा, जाम में क्या गिरा....
धीरे धीरे, खुद-ब-खुद, शराब हो गया....!!!!
               
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                                हिन्दी शायरी दिल से

love# emotional shayari

न शाम की ख्वाहिश न रात की चाहत है...
वो  जिस पहर मिले उस पहर से मोहब्ब्त है...

न शाम की ख्वाहिश न रात की चाहत है...
वो  जिस पहर मिले उस पहर से मोहब्ब्त है...

अच्छा लिखना ही सब कुछ नहीं होता जनाब,

पढ़ने वाले भी तो दिलदार होने चाहिए....
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                    हिन्दी शायरी दिल से 

attitude shayari



दो बूंदे क्या बरसी, 
चार बादल क्या छा गये,, 
किसी को जाम तो
 किसी को कुछ नाम याद आ गये.


अब दिल  पे लग जाती  है हमारी बातें,

जो  कहते थे तुम  कुछ भी कहते हो  अच्छा लगता है..
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attitude shayari, kavita,hindi shayari

चमक हैं चांद में मुझसेऐसे अंदाज मेरे हैं
यह तारे आसमानों मेंहम जैसों ने बिखेरे हैं।।

मुझे मुझसे मोहब्बत हैयह दर्पण बोल देता है
झूठ कितना है रिश्तो मेंपोल सब खोल देता है
मुझे चुपके से कहता हैदीवाने हम भी तेरे हैं।।

यह जीवन है मेरा अपनामेरे संघर्ष अपने हैं
चांद को छू के आना हैआंखों में ऐसे सपने हैं
हंस के दिल चुराते हैंदिलो के हम लुटेरे हैं

जो पाना है वो पाएंगेजिसे खोना है खो देंगे
कभी जब टूट जाएं हमसरे महफिल में रो लेंगे
हमने दर्द के मोतीयह कागज पर उकेरे हैं

नफरत करने वालों सेमोहब्बत है हमें ज्योति
बांटता  है वही इंसानचीज जो पास है होती
प्यार जिस दिल में रहता हैउस दिल में रब के डेरे हैं
                                                  अचला एस गुलेरिया
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शेषावतार लक्ष्मण जी


 
बंदउं लछमन  पद जलजाता ।।
सीतल सुबोध भगत सुखदाता।।

  श्रीराम के चतुर्भुज स्वरूप में से एक रुप लक्ष्मण जी का है। बाल्मीकि जी उन्हें
सहससीसु अहीसु महीधरु
कह कर भगवान शेष का अवतार है ।श्री राम की सेवा करना ही उनके जीवन का एकमात्र व्रत है। जब भी बहुत छोटे थे पलने में ही थे तभी से श्री रघुनाथ के अनुयायी हैं ।
विश्वामित्र यज्ञ रक्षा करने यह राम जी के साथ गए। तब बड़े भाई की संपूर्ण सेवा स्वयंकरते थे। रात्रि में जब दोनों भाई मुनि विश्वामित्र के चरण  दबा कर  उनकी आज्ञा से विश्राम करने आते हैं तब लक्ष्मण जी बड़े भाई के चरण  दबाते हैं।बहुत कहने पर सोने के लिए जाते थे। लक्ष्मण जी वैसे तो बड़े सुशील शांत  स्वभाव  के हैं परंतु कोई श्रीराम का किसी प्रकार के अपमान करें तो यह इनसे सहन नहीं होता फिर यह अत्यंत उग्र होते हैं और तब किसी को कुछ भी नहीं गिनते थे ।
जब जनकपुर में राजाओं के द्वारा धनुष ना उठने पर जनक जी ने कहा मैंने समझ लिया कि अब पृथ्वी में कोई वीर नहीं रहा तब कुमार लक्ष्मण को लगा कि इससे तो श्री राम के बल का भी अपमान होता है

वे यह सोचते ही उग्र हो उठे उन्होंने जनक जी को चुनौती देकर अपना शौर्य प्रकट किया इसी प्रकार जब परशुराम बिगड़ते डांटते आए तभी लक्ष्मण जी ने उनका दर्प सहा नहीं गया ।यह श्री राम जी को अपना स्वामी मानते थे सेवक के रहते स्वामी का तिरस्कार हो ऐसे सेवक को धिक्कार है ।परशुराम जी को इन्होंने उत्तर ही नहीं दिया उनकी उनको युद्ध की चुनौती तक दे डाली । जब उन्होंने सुना कि पिता ने माता केकई के कहने पर राम को बनवास देना निश्चित किया है तब का कैकई और राजा पर इन्हें बड़ा क्रोध आया परंतु श्रीराम की इच्छा के विरुद्ध कुछ भी करना इन्हें अभीष्ट नहीं था। यदि राम जी बन जाते हैं तो लक्ष्मण कहां अयोध्या में रहने वाले हैं यह बात सभी जानते थे ।
जब प्रभु ने राजधर्म पिता माता की सेवा कर्तव्य समझा कर इन्हें रहने को कहा तब इनका मुख सूख गया व्याकुल होकर बड़े भाई के चरण पकड़ लिए और इन्होंने रोते रोते प्रार्थना की
गुरु पितु मातु न जानउं काहू
कहउं सुभाउ नाथ पतिआहू।।
जहं लगी जगत सनेह सगाई
प्रीति प्रतीति निगम  निजु गाई
मोरे सबइ एक तुम्ह स्वामी
दीन बंधु उर अंतरजामी।।
धर्म नीति उपदेसिअ ताही
कीर्ति भूति सुगति प्रिय जाही।।
मन क्रम वचन चरन रत होई ।
कृपासिंधु परिहरिअ कि सोई।।

लक्ष्मणजी ने वन में सेवाव्रत लेकर भूख प्यास निद्रा थकावट आदि सब पर विजय प्राप्त कर ली ।वे सदा सावधान रहते थे मार्ग में चलते समय भी
सिय रामपद अंक बराएं।
लखन चलहिं मगु दाहिन लाएं

कहीं प्रभु के चरणों पर अपने पैर ना पड़ जाए इसके लिए वे सतत सावधान रहते थे। वनवास के समय भगवान ने स्वयं लक्ष्मण को अनेक बार ज्ञान वैराग्य भक्ति आदि के उपदेश किए हैं।
14 वर्ष के अखंड ब्रह्मचारी के बल पर ही यह मेघनाथ को युद्ध में जीत सके थे। श्री राम जी की आज्ञा से लक्ष्मण जी कठोर से कठोर कार्य को करने के लिए तैयार रहते थे ।सीता जी को वन में छुड़ाने का काम भरत और शत्रुघ्न जी ने स्पष्ट इंकार कर दिया लक्ष्मण जी के लिए यह हृदय पर पत्थर रखकर करने का काम था किंतु वे श्री राम की आज्ञा किसी प्रकार टाल नहीं सकते थे ।यह कार्य भी उन्होंने स्वीकार कर लिया।
श्रीराम एकांत में काल के साथ बात कर रहे थे उन्होंने यह निश्चय किया था कि इस समय यदि कोई यहां आ जाएगा तो उसे प्राण प्राण दंड दिया जाएगा लक्ष्मण जी को द्वार पर नियुक्त किया गया था ।उसी समय वहां दुर्वासा जी आए और तुरंत श्री राम को मिलने का आग्रह करने लगे ।
विलंब होने पर शाप देकर पूरे राजकुल को नष्ट कर देने की धमकी दी लक्ष्मण जी ने भगवान को जाकर संवाद सुनाया श्रीराम ने दुर्वासा जी का सत्कार किया ऋषि के चले जाने पर श्री रघुनाथ जी बहुत दुखी हुए ।प्रतिज्ञा के अनुसार लक्ष्मण जी को उसमें भीतर जाने के लिए प्राण दंड होना चाहिए था स्वामी को दुख ना हो उनकी प्रतिज्ञा रक्षित रहे इसलिए उन्होंने स्वयं मांग कर निर्वासन स्वीकार कर लिया क्योंकि प्रियजन का निर्वासन  प्राण दंड के समान होता है। इस प्रकार आजन्म श्री राम की सेवा करके श्रीराम के लिए उनका वियोग भी लक्ष्मण जी ने स्वीकार किया था।
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                            कल्याण के सौजन्य से
                        लेखिका अचलाएसगुलेरिया
।। जय सियाराम* ।।
सहजता अमृत है,असहजता विष हैं ।
ये कभी खत्म होने वाला नही,
देखने मात्र से तृप्ति हो जाती है..ये सहजामृत हैं ।
सहजता वो अमृत है जिसे पीना नही,जीना हैं ।
...बापू*
।। सहज ।।


हरे कृष्ण # hare krishna

प्रेम अपरिभाषित है#love#Goodmorning#

                  प्रेम अपरिभाषित 
परमात्मा
का प्रेम क्या है?
यह एक विराट सागर है।
जिसके अनुभव को
शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
जो इस प्रेम को पा लेता है,
उसके लिए कोई दुख नहीं बचता,
न कोई बुढ़ापा और न कोई मृत्यु।
परमात्मा का प्रेम 
आपको बोध कराता है कि आप
शरीर नहीं, शुद्ध चेतना हैं।
आपका कोई जन्म या मृत्यु नहीं है। 
और इस शुद्ध चेतना में जीना ही
परम सुख की स्थिति है
आनन्द की स्थिति है।
जीवन की संगति में जीना है।
                                       ओशो

     प्रेम अपरिभाषित 
पावन नेह सदा ध्रुवनंदा सा बहेगा

जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

अग्रज वंदना "र"कर रहा है।
देखो बड़ों को नमन कर रहा है।।
छोटों को अंक में "प"भर रहा है
परस्पर स्नेह  यह शाश्वत रहेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा
कर्म पथ की ऊंची डगर पर चला है ।
"ए "देखो गौरव से कैसे खड़ा है ।।
अकेले खड़े रहना अपनों की खातिर
हम सब को यह सिखाता रहेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

ममता  मां मरम जिसमें छुपे हैं ।
मान ,नियम ,जिसके आगे झुके हैं।।
संयोग वियोग के भावजगत में
प्रणय को" म"ही सुभाषित करेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

प्रकृति की यह प्रिय सन्नतति है
सम्पूर्ण विश्व इसकी सहज उत्पत्ति है
मानवीय संस्कार सबको सिखा कर
भावों के नूतन रंग भरेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा ।।
                                       अचला एस गुलेरिया
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emotional shayari

मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं।
एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे।।
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जहाँ तक तुम ने छुआ वही तक जिया हूँ,
बाकी सिर्फ खयाल हूँ, ख्वाब हूँ,  धुआँ हूँ..                            shayaripub.com 
सुनसुनो ना 
जैसे
बेमौसम बारिश की
 कुछ बूंदें
शाख के पत्तें गीले
कर देती है,
तुम भी
अनायास ऐसे ही मेरी
जिंदगी में आकर
मुझे 
प्रेम से भिगो दो....!!!
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सुनो ना!
जैसे
बेमौसम बारिश की
 कुछ बूंदें
शाख के पत्तें गीले
कर देती है,
तुम भी
अनायास ऐसे ही मेरी
जिंदगी में आकर
मुझे 
प्रेम से भिगो दो....!!!
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हरे कृष्ण # hare krishna

*अनुभव कहता है कि थोड़ा सोच समझ कर बोलिये अपनों से भी...*

*क्योंकि वे इतनी जल्दी बातें नहीं मानते' जितना जल्दी बुरा मान जाते हैं...*
                 
           🌹🌹🌹 *जय श्री कृष्ण*🌹🌹🌹
               
               *एक वकील का सुनाया हुआ 
                   एक किस्सा* - सत्य घटना


"मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, 
एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा।
उसके हाथ में कागज़ो का बंडल, 
धूप से काला हुआ चेहरा, 
बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े,उसके पंजों में मिट्टी
 लगी थी।"

उसने कहा - "उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है, बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... 
खर्च क्या लगेगा ... "

मैंने उन्हें बैठने का कहा - 

"रघु, पानी दे इधर" मैंने आवाज़ लगाई!

वो कुर्सी पर बैठे!

उनके सारे कागजात मैंने देखे, 
उनसे सारी जानकारी ली, 
आधा पौना घंटा गुजर गया।

"मै इन कागज़ो को देख लेता हूँ ,
फिर आपके केस पर विचार करेंगे। 
आप ऐसा कीजिए, 
अगले शनिवार को मिलिए मुझसे।" 

चार दिन बाद वो फिर से आए- !
वैसे ही कपड़े
बहुत अशांत लग रहे थे

अपने छोटे भाई पर गुस्सा बहुत थे!
 
मैंने उन्हें बैठने का कहा,

वो बैठे!

ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी।

मैंने बात की शुरुआत की ! -
"बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए।
और आपके परिवार के बारे में और आपकी निजी जिंदगी के बारे में भी मैंने 
बहुत जानकारी हासिल की।
मेरी जानकारी के अनुसार:
आप दो भाई है, एक बहन है,
आपके माँ-बाप बचपन में ही गुजर गए।
बाबा आप नौवीं पास है 
और आपका छोटा भाई इंजिनियर है।
अपने छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपने स्कूल छोड़ा, लोगो के खेतों में दिहाड़ी पर काम किया,
 कभी अंग भर कपड़ा और पेट भर खाना आपको नहीं मिला फिर भी भाई के पढ़ाई के लिए पैसों की कमी आपने नहीं होने दी।

एक बार खेलते खेलते भाई पर किसी बैल ने सींग घुसा दिया तब भाई लहूलुहान हो गया।
फिर आपने उसे कंधे पर उठा कर 5 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल लेे गए। 
सही देखा जाए तो आपकी उम्र भी नहीं थी 
ये करने की, 
पर भाई में जान बसी थी आपकी।
माँ बाप के बाद मै ही इन का माँ-बाप… 
ये भावना थी आपके मन में।

फिर आपका भाई इंजीनियरिंग में 
अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले पाया 
और आपका दिल खुशी से भरा हुआ था।
फिर आपने जी तोड़ मेहनत की।
 80,000 की सालाना फीस भरने के लिए आपने रात दिन एक कर दिया यानि बीवी के गहने गिरवी रख के, कभी साहूकार कार से पैसा ले कर आपने उसकी हर जरूरत पूरी की।
फिर अचानक उसे किडनी की तकलीफ शुरू हो गई, डॉक्टर ने किडनी बदलने का कहा 
और
तुम ने अगले मिनट में अपनी किडनी उसे दे दी यह कह कर कि कल तुझे अफसर बनना है,
नौकरी करनी है, 
कहाँ कहाँ घूमेगा बीमार शरीर लेे के। 
मुझे गाँव में ही रहना है, 
ये कह कर किडनी दे दी उसे।

फिर भाई कालेज हॉस्टल पर रहने लगा।त्यौहार पर्व पर घर में जो पकवान मिठाई इत्यादि बनें भाई को देने जाओ, 
कोई तीज त्योहार हो, भाई के कपड़े बनाओ।
घर से हॉस्टल 25 किलोमीटर तुम उसे  भोजन का डिब्बा देने साइकिल पर गए।
हाथ का निवाला पहले भाई को खिलाया तुमने।
फिर आपकी मेहनत रंग लाई ओर भाई इंजीनियर बन गया, 
तुमने प्रशांता वश गाँव के लोगों को खाना खिलाया।
फिर उसने उसी के कॉलेज की लड़की जो दिखने में एकदम सुंदर थी से शादी कर ली ,
तुम सिर्फ समय पर ही वहाँ गए।
भाई को नौकरी लगी, 
3 साल पहले उसकी शादी हुई, 
अब तुम्हारा बोझ हल्का होने वाला था।
पर किसी की नज़र लग गई 
आपके इस प्यार को।
शादी के बाद भाई ने आना बंद कर दिया। 
पूछा तो कहता है मैंने बीवी को वचन दिया है।
घर पैसा देता नहीं, 
पूछा तो कहता है कर्ज़ा सिर पे है।
पिछले साल शहर में फ्लैट खरीदा।
पैसे कहाँ से आए पूछा तो कहता है 
कर्ज लिया है।
मैंने विरोध किया तो कहता है भाई, 
तुझे कुछ नहीं मालूम, 
तू निरा गवार ही रह गया।
अब तुम्हारा वही भाई चाहता है 
गाँंव की आधी खेती बेच कर उसे अपना हिस्सा दे दे।
इतना कह के मैं रुका - रघु की लाई चाय की प्याली मैंने मुँह से लगाई -!
"तुम चाहते हो भाई ने जो मांगा 
वो उसे ना दे कर उसके ही फ्लैट पर 
स्टे लगाया जाए - क्यों यही चाहते हो तुम..." 

वो तुरंत बोला, "हां"

मैंने कहा - हम स्टे लेे सकते है, 
भाई के प्रॉपर्टी में हिस्सा भी माँग सकते हैं

                            पर….

1) तुमने उसके लिए जो खून पसीना एक किया है वो नहीं मिलेगा!

2) तुम्हारीे दी हुई किडनी वापस नहीं मिलेगी!

3) तुमने उसके लिए जो ज़िन्दगी खर्च की है 
वो भी वापस नहीं मिलेगी।

मुझे लगता है इन सब चीजों के सामने 
उस फ्लैट की कीमत शून्य है।
 
तुम्हारे भाई की नीयत फिर गई, 
वो अपने रास्ते चला गया ;
अब तुम भी उसी कृतघ्न सड़क पर मत जाओ।

वो भिखारी निकला,

तुम दिलदार थे।

दिलदार ही रहो …..

तुम्हारा हाथ ऊपर था,

ऊपर ही रखो।

कोर्ट कचहरी करने की बजाय 
बच्चों को पढ़ाओ लिखाओ।
पढ़ाई कर के तुम्हारा भाई बिगड़ गया ,
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि 
तुम्हारे बच्चे भी ऐसा करेंगे..."

वो मेरे मुँह को ताकने लगा।

उठ के खड़ा हुआ, सब काग़ज़ात उठाए 
और आँखे पोछते हुए बोला - 
"चलता हूँ, वकील साहब।" 

उसकी रूलाई फुट रही थी और वो 
मुझे  दिख ना जाए ऐसी कोशिश कर रहा था।

इस बात को अरसा गुजर गया!
                    
कल वो अचानक मेरे ऑफिस में आया।
कलमों में सफेदी झाँक रही थी उसके। 
साथ में एक नौजवान था और हाथ में थैली।

मैंने कहा- "बाबा, बैठो"

उसने कहा, "बैठने नहीं आया वकील साहब, मिठाई खिलाने आया हूँ । 
ये मेरा बेटा, बैंक मैनेजर है !
बैंगलोर में रहता है, कल आया है गाँव।
अब तीन मंजिला मकान बना लिया है वहाँ।
थोड़ी थोड़ी कर के 10–12 एकड़ खेती की जमीन खरीद ली अब।"

मै उसके चेहरे से टपकते हुए खुशी को 
महसूस कर रहा था
"वकील साहब, आपने मुझे कहा था-  
कोर्ट कचहरी के चक्कर में मत पड़ो !"
आपने बहुत नेक सलाह दी 
और मुझे उलझन से बचा लिया।
जबकि गाँव में सब लोग मुझे 
भाई के खिलाफ उकसा रहे थे।
मैंने उनकी नहीं, आपकी बात सुन ली 
और मैंने अपने बच्चो को लाइन से लगाया और भाई के पीछे अपनी ज़िंदगी बरबाद नहीं होने दी।
कल भाई और उनकी पत्नी भी घर आए थे।
 पाँव छू छूकर माफी मांगने लगे।
मैंने अपने भाई को गले से लगा लिया।
और मेरी धर्मपत्नी ने उसकी धर्मपत्नी को 
गले से लगा लिया।
हमारे पूरे परिवार ने बहुत दिनों बाद 
एक साथ भोजन किया।
बस फिर क्या था आनंद की लहर 
घर में दौड़ने लगी।

मेरे हाथ का पेडा हाथ में ही रह गया
 
मेरे आंसू टपक ही गए आखिर. .. .

*गुस्से को योग्य दिशा में मोड़ा जाए 
तो पछताने की जरूरत नहीं पड़े कभी*

बहुत ही अच्छा है इस को समझना 
और अमल में लाना चाहिए।
यह एक सच्ची घटना है 
शिक्षाप्रद है और बेमिसाल भी है!

                         *जय गुरुदेव*

emotional shayari

हमको तुमसे प्यार न होता तो अच्छा होता।
दिल को तुझपे ऐतबार न होता तो अच्छा होता।

दिल में तेरी यादों का ज आना जाना तो होता।
 तेरा इंतजार न होता तो  अच्छा होता।। 
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सुनो 
           मुझे बताओ जरा!
*इससे बड़ा कातिल अब कौन है यहाँ,*

*मजबूरियाँ रोज़ ख़्वाहिशों का गला घोंटती हैं....!*
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एक मेरी ही याद से परहेज़ है तुमको

न जाने किस हक़ीम से दवा लेते हो
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...