shubh sombar,शुभ सोमवार

इंसानियत,
बहुत बड़ा खज़ाना है,
उसे लिबास में नहीं,
इंसान में तलाश करें ।।
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*कमाई की परिभाषा सिर्फ धन से ही तय नही होती*

*रिश्ते, सन्मान, तजुर्बा, प्रेम और सेवा से ही कमाई की परिभाषा तय होती है*

                    *🌺जय सियाराम🌺*

good day








           जरा पता करो उस mist के पीछे इश्क है या risk है या.                        फिर, फिर से कोई twist है            
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good morning

मैं क्यूँ निहारूं बेवज़ह ताज को,

वो तुमसे ख़ूबसूरत हैं क्या ..
                           देव
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एक गीत, love song

वो किस्सा कुछ इस तरह सुनाया हमने
अपने अश्कों को जुबान बनाया हमने

इतने हंसते हुए उठे महफिल से हम
तेरे पत्थरों के शहर को रुलाया हमने

आंखों ने तेरी पहचान को मिटा दिया कब का
दिल में तेरे नाम का घरौंदा जाने क्यों? बनाया हमने

तेरे घर  के उजालों को बचाने के लिए
अपनी हस्ती को बिजली सा जलाया हमने
                      अचलाएसगुलेरिया
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Good morning

पीड़ाएं केवल दुख ही नहीं देती ,
साहस भी देती हैं ,ठीक से खड़ा होने के लिए कई बार लड़खड़ाना पड़ता है....shayaripub.com 
Pirayen kewal dukh hi nhi deti hain.
Sahas bhi deti hain theek se khada hone keliye Kai bar ladkhadana prta hai

Good morning

तुझसे नाराज होकर तुझसे ही बात करने का मन।
ये दिल का सिलसिला भी, कभी न समझ पाये हम।।
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Good morning

     खामोश आंखों से बातें हजार करती है
 वह जो चुपके से मेरे ख्वाबों की छत पर टहलती है 
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good morning, सुप्रभात

बता किस कोने में, सुखाऊँ तेरी यादें,
बरसात बाहर भी है, और भीतर भी है
                                     Dev
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मेरे कौन हो तुम ?

एहसास हो तुम उस प्रेम का,
जो उपजता है पहली बार,
नाजुक से ह्रदय में.......

स्पर्श हो तुम उस स्नेह का,
जो महसूस होती है,
किसी अपने के कंधे पर,
सिर रखने में.......

प्रतीक्षा हो तुम उस मिलन रात की,
जो.......सजाता है 
अपने स्वप्नों में,अपने ह्रदय में.......

एकान्तता हो तुम,
उस सागर किनारे जैसी,
जहाँ बैठ मैं सोचता हूँ,
तुमको ,सिर्फ तुमको.......

प्रेम हो तुम,
वह प्रेम जो उपजा था 
कान्हा के ह्रदय से,राधा के ह्रदय तक पहुँचने को,
सबसे अनभिज्ञ , सबसे सत्य.......

मैं पूछता हूँ खुद से,
आखिर कौन हो तुम?

वह कल्पना,
जो मेरे ह्रदय ने की थी प्रेम की
उस कल्पना का यथार्थ हो तुम,
मेरे प्रेम हो तुम....!!!
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Good morning

जब कभी दिलबर के लबों पर मुस्कान आ गई
चाँद शर्म से छुप गया… काली घटा सी छा गई
भटक रही थी ज़िंदगी… लिए सवाल  राहों में
जो तुम मिले तो…  ज़िंदगी , हर जवाब पा गई

मेरे कौन हो तुम ? 💖🎻
एहसास हो तुम उस प्रेम का,
जो उपजता है पहली बार,
नाजुक से ह्रदय में.......
स्पर्श हो तुम उस स्नेह का,
जो महसूस होता है,
किसी अपने के कंधे पर,
सिर रखने में.......
प्रतीक्षा हो तुम उस मिलन रात की,
जो दुल्हन सजाती है 
अपने स्वप्नों में,अपने ह्रदय में.......
एकान्तता हो तुम,
उस सागर किनारे जैसी,
जहाँ बैठ मैं सोचती हूँ,
तुमको ,सिर्फ तुमको.......
प्रेम हो तुम,
वह प्रेम जो उपजा था,
राधा के ह्रदय से,
कान्हा के ह्रदय तक पहुँचने को,
सबसे अनभिज्ञ , सबसे सत्य.......
मैं पूछती हूँ खुद से,
आखिर कौन हो तुम?
वह कल्पना,
जो मेरे ह्रदय ने की थी प्रेम की
उस कल्पना का यथार्थ हो तुम,
मेरा प्रेम हो तुम

सुप्रभात, good morning

।। जय सियाराम* ।।
मीरा एक ऐसा प्रवाह हैं जो कंकर को शंकर बना दे ।
...बापू ।।
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हरे कृष्ण, hare krishna

अजीब खेल है उस परमात्मा का
         लिखता भी वही है
          मिटाता भी वही है
भटकाता है राह तो
दिखाता भी वही है
        उलझाता भी वही है
        सुलझाता भी वही है
जिंदगी की मुश्किल घड़ी में
दिखता भी नहीं मगर
        साथ देता भी वही है ..
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in