दिल शायराना

                    परिंदा हो जाते।
दुनिया पर जो जाहिर है, वह किस्सा ए मोहब्बत है।
होठों पर ना आता, तो आंखों में छुपा जाते।
कसमसाहट सी है दिल में ,बेचैनी सी आंखों में।
रूबरू होकर इसे ,गर सुन लेते तो कह पाते।
देख कर भी अनदेखा ,तुम जिस अदा से करते हो।
हम भी सितम वहीं करें ,तो जाहिर है न  सह पाते।
ना उम्मीदी से कभी न वास्ता हुआ मेरा।
दिल में घर न कर पाए ,तो आंखों में ही रह जाते। 
यू तन्हा कर  के जाना तेरा ,बेशक ना गवार है।
आवाज दी होती हमें ,बुला लेते तो आ जाते।
कितने जख्मों को दफन किया है, दिल की गहराई में
गर करना ही था मरहम ,तो दिल में ही उतर जाते।
कमतर नहीं है किसी भी सूरत अरमानों की परवाज
आसमा की गरज में,हम भी परिंदा हो जाते।
अंधेरे रोशन करने हैं तो  ,जलना ही  है चिरागों  को 
सूरज की रोशनी में यह खुद ब खुद ही  बुझ जाते।
                         रूमा गगन गुलेरिया।

kavita

                   
                     आकर चीर बढ़ाओ
हे माधव तुम लौट के आओ इस धरा के कष्ट मिटाओ।
संकट में  फिर द्रुपद सुता  है आकर तुम चीर बढ़ाओ।
हर चौराहा कौरव सभा और घर-घर में दुशासन है।
गुड़िया करती करुण पुकार और मौन प्रशासन है।
तार-तार रिश्तो के बंधन मर्यादा का नहीं है भान
तिरस्कृत होती हर बेटी करते-करते सब का मान।
दुर्योधन का किया क्यों सहना आकर मुझे बताओ।
संकट में  फिर द्रुपद सुता है आकर चीर बढ़ाओ

उगना चाहूं सूर्य किरण सी फैलाती जीवन प्रकाश।
वात्सल्य प्रेम से ओतप्रोत करुण हृदय जैसे आकाश
क्यों सहुँ अग्नि परीक्षा मैं क्यों बनूं अहिल्या सी शिला
 देव अपराध पर भी क्यों श्राप गौतम का मुझे मिला?
मूढ़मति कभी न समझी  तुम  ही  कुछ समझाओ।संकट में फिर द्रुपद  सुता  है आकर चीर बढ़ाओ।

क्यों अंधेरे रास्तों में चलने से घबराती हूं?
क्यों अपनों के ही बीच अब मै कतराती हूं?
कैसे भूलू  सब पीड़ा ,और अनचाहे आघात
अपने ही  फिर कहते हैं ना करो  तुम प्रतिघात
कैसी  है  यह लाचारी आकर तुम ही बताओ।
संकट में फिर द्रुपद सुता है आ करचीर बढ़ाओ।
                         रूमा गगन गुलेरिया।
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Gajal

गजल!
चलो गमों का बोझ थोड़ा कम करते हैं।
पहले मुस्कुराते हैं, फिर  आंखें नम करते हैं।

गुजर जाएगा यह दौर -ए -तन्हाई भी।
अब यादों को ही  हमसफर करते हैं।

छलकना ही लाजमी है अब अश्कों का।
दर्द कैसा भी हो,  चलो दफन करते हैं

छू के एहसास को यूं ही बहल जाते है
अरमान सिसक -सिसक के वरहम करते हैं।

आओगे  इस ओर तुम उम्मीद तो नहीं
फिर भी बुहार -ए-राह हम करते हैं।

इन जख्मों को नासूर ही रहने दो।
आप क्यूँ इनको मरहम करते हैं।

दर्द  भी अब तो  सौगात सा लगता है
इसलिए खुद पर ही सितम करते हैं।

चलो गमों का बोझ थोड़ा कम करते हैं।
पहले मुस्कुराते हैं ,फिर आंखें नम करते हैं।
                    रूमा गगन गुलेरिया।

Good night

हर रोज गिरकर भी,
मुक्कमल खड़े हैं...!

ए जिंदगी देख,
मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं ...!!
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Good morning

खुद को खुश रखने के तरीके खोजे, 

तकलीफें तो आपको खोज ही रही है !!
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Good morning

जीवन चलने का नाम 
चलते रहो सुबह शाम 
*राधे - राधे 
॥आज का भगवद् चिन्तन॥ 
                 16 - 09 - 2023 
                  ॥कृष्ण तत्व॥
                  संतों एवं शास्त्रों का यही मत है कि श्रीकृष्ण होना जितना कठिन है, श्रीकृष्ण को समझना उससे भी कई अधिक कठिन हो जाता है। कुछ लोगों द्वारा उन योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के केवल एक पक्ष को जन मानस के समक्ष रखकर उन्हें भ्रमित किया जाता है। 

                 श्रीकृष्ण समग्र हैं तो उनके जीवन का मुल्यांकन भी समग्रता की दृष्टि से होना चाहिए। श्रीकृष्ण विलासी हैं तो महान त्यागी भी हैं। श्रीकृष्ण शांति प्रिय हैं तो दूसरी ओर क्रांति प्रिय भी हैं। श्रीकृष्ण मृदु हैं तो वही कृष्ण कठोर भी हैं। कृष्ण मौन प्रिय हैं तो वाचाल भी बहुत हैं। कृष्ण रमण विहारी हैं तो अनासक्त योग के उपासक भी हैं।

                  श्रीकृष्ण में सब कलाएं हैं और पूरी की पूरी हैं। पूरा त्याग-पूरा विलास। पूरा ऐश्वर्य-पूरी लौकिकता। पूरी मैत्री - पूरा वैर । पूरा अपनत्व पूरी अनासक्ति। जिस प्रकार दीये द्वारा दिवाकर का मुल्यांकन नहीं हो सकता, उसी प्रकार तुच्छ बुद्धि से उस समग्र और विराट चेतना का मुल्यांकन भी नहीं हो सकता है। 
*श्री राधा*

emotional shayari

दीदार न सही याद ही कर लिया कर,

हम नें कब कहा हमें हिचकियों से परहेज है.

ग़ज़ल

लड़ना खुद से,खुद को सिखाऊंगा
आज नहीं तो कल,मैं जीत जाऊंगा

कुछ रस्तों ने साथ नहीं दिया मेरा
मंजिल पर बैठ कर उन्हें चिढ़ाऊंगा

मैं मुश्किलों से डरने वाला नहीं हूँ
हर एक मुसीबत से भिड़ जाऊंगा

ज़माने ने हर बार ही गिराया है मुझे
अब मैं ज़माने को,उड़के दिखाऊंगा

तरस जाएंगे आँखों में आने को मेरी
आंसुओं को कुछ इस कदर सताऊंगा

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सुप्रभात# अनमोल# बचन#

रात्रि दिवस का पहिया चलता 
जीवन पल पल रंग बदलता ।।

अपने कर्म सुधारें हर पल ।
बेहतर कर लें आने वाला कल।
 वृक्ष मेहनत से वही लगाना
 जिसके मिले तुम्हें मीठे फल।
 जग में वह प्रकाश बनों... जैसे प्राची में सूर्य निकलता
 
प्रकृति सरलता हमें सिखाती।
 प्रेम से अपने पास बिठाती ।
देकर सुख दुख भरी यह बगिया 
       नए-नए हमें पाठ पढ़ाती
 तुझे बांटनी जग में खुशबू बनना है गुलाब महकता
                    अचलाएसगुलेरिया
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🦋🦋Good Morning 🦋🦋

जीवन में प्रसन्न वही हैं 🦋🦋
जो अपना मूल्यांकन करते हैं,🦋🦋 और परेशान वो हैं जो दूसरों का मूल्यांकन करते हैं .

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Good morning

सबका सबके बिना काम चल जाता है,

ये तो मन है ! फिज़ूल घबराता है !
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Good morning

बहुत ख़ूबसूरत है...                                    
तुम्हारे इन्तज़ार का आलम !

बेकरार सी आँखों में...                                    
इश्क़ बेहिसाब लिए बैठें हैं !! 
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Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in