सुप्रभात, good morning

खो" देते हैं,रिश्तों को
फिर...
"खोजा" करते हैं,
यही खेल हम!
 जिन्दगी भर "खेला" करते हैं.....
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बच्चे के जन्मते ही 
एक भाषा भी जन्मती है
उसके भीतर
उसकी माँ के भीतर 
वो भाषा जो बच्चा बोल नहीं सकता
वो भाषा जो माँ समझ जाती है।
वो भाषा जिसमें वो रोता है
वो भाषा जिसमें वो हंसता है
वो भाषा जिसमें माँ बसती है
वो भाषा जिससे माँ की हस्ती है।
फिर एक दिन बच्चा 
वो भाषा तब भूल जाता है
जब माँ बोल नहीं पाती.
🌹GOOD DAY🌹
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Good morning

उसकी आँखे बयां करती होंगी मेरी बेपन्हा मोहब्बत….
शायद …..
इसीलिए …
नजर झुक जाती है उसकी मेरी गली से गुज़रते हुए

उसकी आँखे बयां करती होंगी मेरी बेपन्हा मोहब्बत….
शायद …..
इसीलिए …
नजर झुक जाती है उसकी मेरी गली से गुज़रते हुए

 आओ इक मयकदा बनाए हम:
शेख वाइज़ को भी पिलाएं हम।

ज़िन्दगी खुद में इक इबादत है;
राज़ की बात ये बताएं हम।

घर के बाहर बहुत अंधेरा है;
आओं भीतर शमा जलाएं हम।

आशिकी बेखुदी नहीं यारो;
प्यार को बन्दगी बनाएं हम।

इश्क में रोने का है क्या मतलब?
आओ हंसकर पिएं - पिलाएं हम।

मेरे मुर्शिद ने इल्म ऐसा दिया
आदमी से खुदा हो जाएं हम।।
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विभीषण

*पात्र अत्यंत विलक्षण हो जाना तटस्थ पुरुष दर्पण हो जाना*
            *आसान नहीं विभीषण हो जाना ।*

*महलों में योगी वह रहता 
सुख-दुख सब सम भाव से सहता*
      *हरिदर्शन करते-करते स्वयं एक दर्शन हो जाना ।।*

*सत्य पक्ष में ध्वजा धारी है 
बड़े भाई का आज्ञाकारी है 
कर्म धर्म से नीच भाई के आगे सदा नतमस्तक रहना ।।

पुलस्त्य कुल वंशी ज्ञान रूप सब ।
बने निशाचर अधम कुरूप अब
अतिदुश्कर  है  सबका .....पुनः सुमार्ग पर आना


रावण जब सीता हर लाया
 अग्रज को बहुत समझाया
कौन बचाए युद्ध से उसको जिसने निज विनाश हो ठाना

हनुमानको वैदेही का पता बता।
घर का भेदी होने का कलंक उठाया
परमार्थ कारण ध्वल चरित्र कलंकित कर लेना

वीर पुरुष ने महिपति को पंथ दिखाया
नीति विरुद्ध ना मारें दूत यह मंत्र समझाया
क्रोधी, मोही, दंभी  सभा में बिना डरे, अपना मत देना

  सन्मार्ग पर लाने का प्रयत्न किया था
युद्ध रोकने का हर संभव यत्न किया था
छोटे प्रयास का बड़े आरोप में दफन हो जाना

स्वाभिमान को तोड़ दिया अपने अपनों ने
ऐसा दुर्व्यवहार न सोचा था सपनों में
जगत से ठोकर खाकर प्रभु शरण में जाना

अगर ना होता विभीषण तो क्या लंका होती
पराधीन हो सारी जनता हर पल रोती
शत्रु के हाथों अपना राजतिलक करवाना

अश्रु धार से राम की मानस पूजा करते
अपने आपको हरि चरणों में अर्पित करके
श्रुति निंदा से मुक्त हो राम राम गुण गाना

असत्य हारा जब रावण हारा लंका ना हारी
  पा हरिभक्त नरेश सभी हर्षे नर नारी
पुरवासियों को राम नाम का मरम सिखाना
                              अचला शर्मा गुलेरिया
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Good morning, सुप्रभात

नजरों का खेल था साहब,.....

वो चुरा ना सके और हम हटा ना सके !!
हसीनों में हसीन फूलों में गुलाब हो तुम
कैसे तुम्हें बताऊँ कितनी लाजवाब हो तुम
काली काली तुम्हारी ज़ुल्फें
खुली हो तो हो जाये दिन में अंधेरा
गोरा चंदन जैसा तुम्हारा चितवन
देख मचल जाये ये दिल मेरा
तुम्हारे मीठे मीठे बोल
सुनने को मन करता है बार बार
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good morning

*गलती आपकी हो या मेरी*

    *रिश्ता तो हमारा है ना |*

     *Accept  &  Adjust*
 

*सुप्रभात*
*जय श्री कृष्णा*
*ऑखे चाहे जितनी मर्जी तेज हो*

*कौन अपना और कोन पराया यह तो सिर्फ वक्त का चश्मा ही दिखाता है.*


*सुप्रभात*
*जय श्री कृष्णा*
 

 

सुविचार, inspiration thoughts

"उम्मीद जब बोझ लगती है ll
 जिंदगी अफसोस करती है ll
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 आदमी नशे में चूर रहता है, 
 सफलता मदहोश करती है ll
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 अपना पता मेहनत रखिये
 मंजिल हमें खोज सकती है ll
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 सब्र कछुए की चाल चल रहा, 
 जल्दबाजी खरगोश लगती है ll
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 आपकी खुशी में मेरी खुशी है, 
 खुशी इसी में संतोष करती है ll"
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Kavita, नज्म, बाकी है

कुछ याद नहीं कुछ भूल गए कुछ अभी भुलाना बाकी है🌹
सब रास्ते हैं याद शहर के ..उन पर चलकर घर तक जाना बाकी है।।🌹🌹

सौ गीत लिखे.. शब्दों को पिरोया नज़्मों में🌹
मन की सड़कों की कालिख से हर भाव भरा फिर नगमो में
जो आंख के पानी से हो लिखा वो एक तराना बाकी है।।🌹🌹

है शोर बहुत इस दुनिया में कोलाहल से भरा है जहां🌹
मन की आग बुझाने को ढूंढे दिल पानी यहां वहां
जो अमृत बरसाए जग में वो राग बनाना बाकी है।।🌹🌹
                                                  अचलाएसगुलेरिया
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सब्र रखना,

 जीवन में एक वो पहर रखना

वह सब कुछ स्वयं ही करता है,
 इस बात की यार खबर रखना

तुझे सही लगे या गलत लगे 
बस दिल में यार सब्र रखना

मन में हर भाव रहे जिंदा
 चुरा सागर से दिल में लहर रखना

जाने कब तन्हाई तन्हा कर दे
 तू फोन में सारा शहर रखना

ना हाल सुनाना ना सुनना 
नजरों में समझ की नजर रखना

जहां तुम हो और हो परमपिता
 जीवन में एक वो पहर रखना
                            अचलाएसगुलेरिया
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Have a wonderful day,Goodmorning

बाप....
तलब तेरे साथ की मुझमे आज भी जारी है,
कुछ पल जो गुज़रे संग तेरे सदियों पे भारी हैं.....!
-अज्ञात
मैं हर्फ़ हर्फ़ बिखरी हूँ 
जब भी खोलोगे ये क़िताब
मैं याद आऊँगी ...

 बरसात की हर बूँद में
मिलूँगी बरसती मैं...
कभी बारिशों में भीगोगे
तो याद आऊँगी....

तेरी  साँस-साँस में..
बसेरा है मेरा...
सुनोगे सांसों का संगीत
 तो समझ जाओगे..

लम्हा लम्हा मैं भी
तेरी याद में तपती हूँ 
खुद को खुद से खफा पाओगे
तो जान जाओगे 

मैं पल पल ....
रब से तेरी खुशी मांगती हूँ 
तुम जब हाथ दुआ में उठाओगे
तो याद आऊँगी.....
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bye-bye 2022

दिसंबर की सर्द हवाएं मेरा क्या बिगाड़ लेंगी
गर्म चाय पीते हैं तेरी यादो की शॉल लपेट कर।।
तुम नही हो पास मेरे....फिर भी तुम ही तुम नजर आते हो...
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आवाज देना चाहूँ भी तो कैसे....पल प्रति पल तुम मुझ में ही समाते हो....

मन ही मन में ना जाने कितना कुछ कह कर तुमसे...मुस्कुरा देती हूँ मैं...

ख्यालो मे तुम्हारे....पीड़ा के आँसू तक बहा लेती हूँ मैं.....

कभी कभी सोचती हूँ...क्या मेरे जीवन में कोई ऐसी जगह शेष हैं...जहाँ नही हो तुम....

मेरी हँसी में.....बेबसी में....आँखों में... आँसुओं में....मेरी हर खुशी में हो तुम....

मेरे ख्यालों में....सवालों में.....मेरे ख्वाबों में हो तुम.....

तुम्हारा जिक्र है मेरे हर लफ्ज़ में....मेरी प्रतीक्षा में...इन पंक्तियों में छुपी हर आरज़ू में हो तुम....

विरह में तड़पती रूह और इस मन की जुस्तजू में सिर्फ हो तुम....
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दिल शायराना # emotional shayari

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गांव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए
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साभार: कविता कोश

चलो सफर पर निकले साथ साथ 
मेरे ख्यालों के हाथ में तेरे सपनों के हाथ 
वंदिशों की किश्ती पतवार दूरियों की
समंदर खवाबों का लहरें मजबूरियों की
अहसास की परतों में आरजूओं की तपन
साँसों के आहट में विरह की अगन 
तमन्नाओं में मेरी बसा तेरा बजूद 
हवायें छू रही या तू भी है मौजूद 
लगा कहीं तू भी है मौजूद 
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चलो सफर पर निकले साथ साथ 
मेरे ख्यालों के हाथ में तेरे सपनों के हाथ 
वंदिशों की किश्ती पतवार दूरियों की
समंदर खवाबों का लहरें मजबूरियों की
अहसास की परतों में आरजूओं की तपन
साँसों के आहट में विरह की अगन 
तमन्नाओं में मेरी बसा तेरा बजूद 
हवायें छू रही या तू भी है मौजूद 
लगा कहीं तू भी है मौजूद
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Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in